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53 लाख के साइबर फ्रॉड आदर्श चौबे को जमानत:जिला जज की कोर्ट में सुनवाई, अप्लीकेशन से खाते में लाखों ट्रांसफर किए

📰 Bhaskar 🕐 1 min read 📅 August 19, 2026 👁 3 views
53 लाख के साइबर फ्रॉड आदर्श चौबे को जमानत:जिला जज की कोर्ट में सुनवाई, अप्लीकेशन से खाते में लाखों ट्रांसफर किए
वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय की अदालत में साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में आरोपी आदर्श चौबे को जमानत मिल गई। सत्र न्यायाधीश, संजीव शुक्ला की अदालत ने 19 अगस्त 2026 को जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए ग्राम धमही, रामगढ़, थाना चुनार मिर्जापुर निवासी आरोपी आदर्श चौबे को 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि के दो जमानतदारों की शर्त पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में अधिवक्ता अधिवक्ता अविनाश गुप्ता, सत्यम सिंह व विवेक सिंह ने पक्ष रखा। 53 लाख रुपये के लेनदेन की बात आई सामने अदालती आदेश में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत तथ्यों के मुताबिक साइबर अपराध मुख्यालय, लखनऊ से प्राप्त शिकायतों की जांच में एक बैंक खाते में 12 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 के बीच करीब 53 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस को कथित साइबर अपराध से जुड़े एक गिरोह के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक गिरोह में सुजल सिंह, कमलेश कुमार विश्वकर्मा, आशीष यादव, आदर्श चौबे, युवराज वर्मा, पियूष सिंह तथा प्रशांत सिंह समेत अन्य लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। आरोप है कि गिरोह के सदस्य लोगों को पैसे का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाते या उनका इस्तेमाल करते थे। इसके बाद बैंक खातों की किट, एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक आदि अपने कब्जे में लेकर कथित रूप से साइबर अपराध से प्राप्त रकम का लेनदेन किया जाता था। अभियोजन के अनुसार, खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों को करीब 5,000 रुपये दिए जाते थे। इसके बाद विभिन्न बैंक खातों में साइबर अपराध से संबंधित रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। आदेश में एसएमएस फॉरवर्डर एप्लीकेशन के माध्यम से भी साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन किए जाने का उल्लेख है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज बरामद करने का दावा अदालती रिकॉर्ड के अनुसार पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए जाने की बात कही है। बरामदगी के संबंध में पुलिस ने इन वस्तुओं को साइबर अपराध की जांच से संबंधित साक्ष्य के तौर पर अदालत के सामने रखा। पुलिस का यह भी आरोप है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग बैंक खातों में साइबर अपराध से अर्जित रकम मंगवाकर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर करते थे और इस प्रक्रिया में कमीशन के रूप में रकम बांटी जाती थी। बचाव पक्ष ने कहा- गलत तरीके से फंसाया गया जमानत प्रार्थना पत्र पर बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि आरोपी को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का नाम मुख्य रूप से कॉल डिटेल के आधार पर सामने लाया गया है और उसके खिलाफ स्वतंत्र एवं ठोस साक्ष्य नहीं हैं। यह भी बताया गया कि आरोपी 29 जुलाई 2026 से जिला कारागार में निरुद्ध है तथा उसकी ओर से पूर्व में कोई जमानत प्रार्थना पत्र विचाराधीन नहीं है।
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