politics
*आरएसएस के बारे में धूल झोंकने में एक बार फिर नाकाम रहे भागवत*
*(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते)* आरएसएस के सरसंघचालक (सुप्रीमो) मोहन भागवत की आरएसएस की विचारधारा – और उसके कट्टर हिंदुत्व ब्रांड को – नरम, सहनशील और समावेशी दिखाने की समय-समय पर की जाने वाली कोशिशें ज़्यादा से ज़्यादा बेकार और अर्थहीन होती जा रही हैं। कोई भी इन उपदेशों पर यकीन नहीं करता, [...]
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