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आधुनिक मशरूम प्लांट का लालच देकर 2.67 करोड़ की ठगी:आशुतोष मंगलम गिरफ्तार; मुजफ्फरपुर समेत 3 जिलों में है केस, बहन के साथ मिलकर करता था ठगी
सरकारी योजनाओं के तहत मशरूम उत्पादन कर स्वरोजगार शुरू करने वाले लाभुकों से करीब 2 करोड़ 67 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले में वांछित नामजद अभियुक्त आशुतोष मंगलम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के दामूचक निवासी आशुतोष के खिलाफ मुजफ्फरपुर के सरैया, बोचहां और मुशहरी थानों में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, आशुतोष और उसकी बहन मिलकर यक्ष ग्रेविटी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम की फर्म चलाते थे। फर्म के माध्यम से लाभुकों को मशरूम उत्पादन के लिए स्मार्ट हट बनवाने, तकनीकी मदद और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था। बैंक से लोन स्वीकृत कराने में भी मदद की जाती थी। लोन मिलने के बाद लेते थे राशि, फिर निर्माण में करते थे टालमटोल ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने बताया कि आरोपितों का तरीका यह था कि प्रधानमंत्री रोजगार योजना और बिहार हॉर्टिकल्चर मिशन जैसी योजनाओं के तहत लाभुकों को मशरूम कल्टीवेशन के लिए तैयार किया जाता था। उन्हें बताया जाता था कि बैंक से लोन मिलने के बाद दो-तीन महीने में स्मार्ट हट तैयार करा दिया जाएगा। साथ ही लाभुकों को हर महीने करीब 12 से 15 हजार रुपए की आमदनी होने का भरोसा दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, बैंक से लोन की राशि जारी होने के बाद आरोपित लाभुकों से राशि ले लेते थे। इसके बाद स्मार्ट हट का निर्माण कराने में टालमटोल की जाती थी। जब लाभुक अपनी राशि वापस मांगते थे तो उन्हें चेक दिया जाता था, जो बाद में बाउंस हो जाता था। पुलिस इसी तरीके को आरोपितों का मोडस ऑपरेंडी मानकर जांच कर रही है। सरैया में 21 लाख की धोखाधड़ी का मामला आशुतोष के खिलाफ पहला प्रमुख मामला सरैया थाना कांड संख्या 52/26, जनवरी 2026 में दर्ज हुआ था। इस मामले में करीब 21 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस के अनुसार, मशरूम उत्पादन के लिए लाभुकों से राशि लेने के बाद स्मार्ट हट का निर्माण नहीं कराया गया। रकम लौटाने के नाम पर दिए गए चेक भी बाउंस हो गए। इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस को आशुतोष के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की जानकारी मिली। इसके बाद दूसरे मामलों को भी जांच के दायरे में लिया गया। बोचहां में 1.18 करोड़ से ज्यादा की ठगी का आरोप पुलिस के अनुसार, बोचहां थाना क्षेत्र में भी आशुतोष के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। बोचहां थाना कांड संख्या 225/25 में करीब 1 करोड़ 18 लाख 58 हजार 727 रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। इसमें भी सरकारी योजना के तहत मशरूम उत्पादन से जुड़े लाभुकों को लोन दिलाने और परियोजना स्थापित कराने के नाम पर राशि लेने की बात सामने आई है। वहीं, मुशहरी थाना कांड संख्या 219/25, जो 8 सितंबर 2025 को दर्ज हुआ था, उसमें करीब 72 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में कई लाभुक शामिल हैं और राशि के लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जीविका संगठन और सोशल मीडिया से बनाते थे संपर्क ग्रामीण एसपी ने बताया कि आरोपितों के लाभुकों तक पहुंचने के दो प्रमुख तरीके सामने आए हैं। एक, जीविका संगठन से जुड़े परिचितों के माध्यम से सदस्यों तक पहुंच बनाई जाती थी। दूसरा, सोशल मीडिया के जरिए मशरूम उत्पादन और उससे होने वाली आमदनी का प्रचार कर लोगों को संपर्क में लाया जाता था। लाभुकों को परियोजना से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता था। इसके बाद बैंक से लोन स्वीकृत कराने में मदद की जाती थी। लोन की राशि मिलने के बाद आरोपितों पर राशि हड़पने और लाभुकों को झूठा आश्वासन देने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और राशि का इस्तेमाल कहां किया गया। सीतामढ़ी और गोपालगंज में भी मामले की जानकारी पुलिस के अनुसार, आशुतोष के खिलाफ सीतामढ़ी और गोपालगंज के थानों में भी मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। इन मामलों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। ग्रामीण एसपी ने बताया कि अब तक सामने आए मामलों को जोड़ने पर करीब 2.67 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। जांच आगे बढ़ने पर यह रकम और बढ़ सकती है। बड़े अधिकारी की पत्नी को भी योजना के जरिए टारगेट करने की बात पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित सरकारी योजनाओं के तहत मशरूम उत्पादन शुरू करने के इच्छुक लोगों को टारगेट करता था। इसी क्रम में एक बड़े अधिकारी की पत्नी को भी इस योजना के जरिए टारगेट किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि किन-किन लोगों से किस तरीके से राशि ली गई और इस पूरे नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं। 110 जीविका दीदियों के नाम पर 3.63 करोड़ कर्ज का अलग मामला आशुतोष मंगलम की एजेंसी पर 110 जीविका दीदियों के नाम पर करीब 3.63 करोड़ रुपए का कर्ज लिए जाने का भी आरोप है। दीदियों का कहना है कि प्रत्येक के नाम पर करीब 3.30 लाख रुपए का कर्ज लिया गया, लेकिन उन्हें परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिला। आरोप है कि ब्याज समेत प्रत्येक दीदी के नाम पर कर्ज बढ़कर करीब 5.5 लाख रुपए तक पहुंच गया है। इस मामले को लेकर जीविका दीदियां लगातार कार्रवाई की मांग कर रही हैं। मामला एसडीएम पूर्वी के न्यायालय में विचाराधीन है। दूसरी सुनवाई में दीदियों ने एजेंसी से जुड़े 20 बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं, जिनका लिखित जवाब आशुतोष मंगलम से मांगा गया है। मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होनी है। बहन की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस कर रही प्रयास इस पूरे मामले में आशुतोष की बहन का नाम भी सामने आया है। पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है और उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही लाभुकों से जुड़ी पूरी जानकारी, बैंक ट्रांजेक्शन और राशि के इस्तेमाल का पता लगाया जा रहा है। ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर ने कहा कि मामले में ठोस साक्ष्य संकलित कर आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी और उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और धोखाधड़ी की रकम की रिकवरी की दिशा में भी कार्रवाई कर रही है।
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