top
अभिभावक भी शिक्षा की नींव मजबूत करने में भागीदार बनें
विद्यालय अपनी नियमित गतिविधि बाल सभा को गांव की चौपाल, सार्वजनिक स्थल या समुदाय के बीच प्रस्तुत करता था। इससे विद्यालय स्वयं समाज के बीच पहुंच जाता था। बिना किसी वित्तीय भार के इस पहल का मनोवैज्ञानिक प्रभाव यह था कि अभिभावक और गांव के लोग अपने बच्चे को सीखते हुए देखने लग गए थे।
Read full article on Patrika News