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अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा छोड़ी:DLB के दो नोटिस देने से नाराज, विधानसभा अध्यक्ष पर लगाए आरोप; नागौर चुनाव का बनाया था प्रभारी
अजमेर में नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा के दो बार मेयर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की। गहलोत ने कहा- स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से हाल ही मुझे दो मामलों में 17-ए की परमिशन और नोटिस जारी करने से नाराज होकर ये निर्णय लिया। गहलोत ने गुरुवार को एक वीडियो जारी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी आरोप लगाए। साथ ही धर्मेंद्र गहलोत ने नागौर चुनाव के प्रभारी पद से मुक्त करने की बात भी कही। बता दें कि धर्मेंद्र गहलोत अजमेर से साल 2005 और 2015 में मेयर रहे थे। डीएलबी ने 18 अगस्त को दिया है नोटिस धर्मेंद्र गहलोत ने वीडियो में कहा- भारतीय जनता पार्टी का आभार, जिन्होंने नागौर परिषद का आगामी होने वाले चुनाव के लिए मुझे प्रभारी नियुक्त किया। ये उत्तरदायित्व मैं नहीं निभा पाऊंगा। इसके पीछे कारण यह है कि स्वायत्त शासन विभाग ने 18 अगसत को दो मामलों में एक 17A की परमिशन देने और एक में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गहलोत ने कहा- दोनों लैटर स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी किए गए हैं, जो मुझ पर आरोप लगाते हैं। अजमेर की जनता और अन्य लोग जानते हैं कि एक शिकायत 2021 की है, जब मैं महापौर नहीं था। एक मामला महापौर के समय का है, जो 6-7 साल पुराना है। चुनाव के समय दबाव के लिए जारी किया पत्र धर्मेंद्र गहलोत ने कहा- वासुदेव देवनानी से मेरे राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं। इस कारण वे हमेशा से यह कोशिश करते हैं कि दूसरे को झुका दें, समाप्त कर दें। इसी के तहत अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए चुनाव के समय दबाव में लेने के लिए इस प्रकार के पत्र स्वायत्त शासन विभाग से जारी करवाए हैं। गहलोत ने कहा- चुनाव के दौरान कांग्रेस इस प्रकार के प्रश्न उठा सकती है तो जाने-अनजाने में भाजपा कठघरे में आएगी। धर्मेंद्र गहलोत ने कहा- ये देवनानी और मेरी लड़ाई है। मैं नहीं चाहता कि हम दोनों की लड़ाई के बीच में भारतीय जनता पार्टी पर किसी प्रकार का प्रश्न चिह्न बने। मिटने को तैयार, झुकने को नहीं धर्मेंद्र गहलोत ने कहा- इस प्रकार के जो लैटर डीएलबी ने जारी करवाए हैं, यह मेरी छवि को धूमिल करने के लिए हैं। मैं मन पर पत्थर रखते हुए इस बात का निर्णय ले रहा हूं कि जब तक ये मामला निस्तारित नहीं हो जाएं। नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। साथ ही जो नागौर का दायित्व दिया गया है, उससे भी प्रदेश नेतृत्व मुक्त करें। वीडियो में गहलोत ने कहा- मैं देवनानी को खुली चुनौती देता हूं। उन्होंने मुझे अभी अच्छी तरह से पहचाना नहीं। मैं उन वीर कुमार का चेला हूं, जो आज तक किसी के सामने नहीं झुका। धर्मेंद्र गहलोत मिटने को तैयार है, किंतु झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा- ये धर्मेंद्र गहलोत और वासुदेव देवनानी के बीच की लड़ाई है, ये लड़ाई जारी रहेगी। भारतीय जनता पार्टी से इसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं। 17ए में स्वीकृति इस मामले को लेकर हो सकती है करीब 6 साल पहले धर्मेंद्र गहलोत के मेयर रहते हुए 13 कॉमर्शियल नक्शों की फाइलों को मंजूरी वाला मामला काफी चर्चित रहा। राज्य सरकार की ओर से तत्कालीन महापौर गहलोत को राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 39 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस को उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। गहलोत पर आरोप था कि उन्होंने नियमों के खिलाफ जाकर निगम के उपायुक्त से 13 कॉमर्शियल नक्शों की फाइलों को मंजूरी दिलवा दी। इस मामले की शिकायत राज्य सरकार को मिलने पर तत्कालीन एडीएम सिटी अशोक योगी के अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया था।
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