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अलीगढ़ भाजयुमो में उम्र बनेगी सबसे बड़ा फैक्टर:जातीय समीकरण से पहले उम्र की कसौटी, युवा चेहरों को मौका मिलेगा
अलीगढ़ में भाजपा के मुख्य संगठन के गठन के बाद अब युवा मोर्चा की नई टीम को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार जिलाध्यक्ष की दौड़ में जातीय समीकरण और राजनीतिक पैरोकारी से ज्यादा उम्र का फैक्टर अहम माना जा रहा है। भाजपा ने राष्ट्रीय युवा मोर्चा की कमान 35 साल के डॉ. हेमांग जोशी को सौंपी है। यूपी में भी युवा मोर्चा के नेतृत्व में बदलाव के बाद अब सबकी नजर जिला और महानगर इकाइयों पर है। पार्टी में चर्चा है कि अगर राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की तरह जिलों में भी युवा चेहरों को प्राथमिकता दी गई और उम्र को अहम कसौटी बनाया गया तो अलीगढ़ में कई पुराने दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय ऐसे नेता, जो उम्र की सीमा पार कर चुके हैं, दौड़ से बाहर हो सकते हैं। वहीं, कम उम्र के उन कार्यकर्ताओं के लिए रास्ता खुल सकता है, जो अब तक संगठन में सक्रिय तो रहे हैं, लेकिन बड़े पद की दौड़ में पीछे माने जाते थे। दो अध्यक्ष पद, दावेदार कई अलीगढ़ में भाजयुमो की जिला और महानगर इकाई के लिए अलग-अलग अध्यक्ष चुने जाएंगे। दोनों पदों को लेकर दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कोई संगठन में अपनी लंबे समय की सक्रियता और अनुभव को आधार बना रहा है तो कोई वरिष्ठ नेताओं की पैरोकारी के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। हालांकि इस बार मामला इतना सीधा नहीं है। दावेदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी अनुभव को प्राथमिकता देगी या कम उम्र के कार्यकर्ता को आगे बढ़ाएगी। उम्र का फॉर्मूला लगा तो पुराने दावेदारों को झटका भाजयुमो को भाजपा के युवा कैडर तैयार करने वाले संगठन के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर 35 साल के नेता को जिम्मेदारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर भी युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की चर्चा तेज हो गई है। अगर जिला और महानगर अध्यक्षों के चयन में उम्र की कोई स्पष्ट या अनौपचारिक कसौटी लागू होती है तो लंबे समय से दावेदारी कर रहे कई नेताओं का समीकरण बिगड़ सकता है। इसके उलट अपेक्षाकृत कम उम्र के कार्यकर्ताओं के लिए मुकाबला अचानक खुल जाएगा। उम्र के बाद जातीय समीकरण की बारी अलीगढ़ में संगठनात्मक नियुक्तियों में जातीय संतुलन भी अहम रहा है। जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष पद पर अलग-अलग समय में क्षत्रिय, लोधी, जाट और ब्राह्मण समाज के नेताओं को मौका मिलता रहा है। मौजूदा जिला अध्यक्ष लोधी समाज से हैं। अब मुख्य भाजपा संगठन की जिला इकाई की कमान जाट समाज के पास होने के बाद युवा मोर्चा में भी जाट चेहरे को लेकर चर्चा है। हालांकि पार्टी के अंदर इस पर एक राय नहीं है। ऐसे में अगर जाट चेहरे को दोहराने की संभावना कम होती है तो लोधी, क्षत्रिय और ब्राह्मण दावेदारों के बीच मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। लेकिन इस बार सिर्फ जातीय समीकरण से फैसला होने की संभावना कम मानी जा रही है। उम्र, संगठन में सक्रियता, वरिष्ठ नेताओं की पसंद और राजनीतिक खेमेबंदी भी दावेदारों की किस्मत तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। महानगर में वैश्य चेहरा और युवा उम्र का फॉर्मूला? महानगर इकाई में लंबे समय से वैश्य समाज से अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा होती रही है। ऐसे में इस पद के लिए वैश्य समाज के दावेदारों को मजबूत माना जा रहा है। लेकिन यहां भी अगर उम्र का फैक्टर लागू हुआ तो सिर्फ सामाजिक समीकरण के आधार पर दावेदारी मजबूत नहीं मानी जाएगी। यानी पार्टी अगर 'युवा चेहरा + सामाजिक संतुलन' के फॉर्मूले पर चली तो ऐसे दावेदार को फायदा मिल सकता है, जो कम उम्र का होने के साथ संगठन और अपने समाज दोनों में स्वीकार्यता रखता हो। पुराने चेहरों की वापसी या नए नेताओं पर दांव? भाजपा में इस समय दो तरह की लॉबिंग की चर्चा है। एक खेमे की कोशिश पुराने और अनुभवी चेहरों को दोबारा जिम्मेदारी दिलाने की है। वहीं नए दावेदारों के समर्थक संगठन में बदलाव और युवा नेतृत्व की जरूरत का तर्क दे रहे हैं। इसलिए इस बार मुकाबला सिर्फ 'कौन किस जाति का है' तक सीमित नहीं रहेगा। उम्र, संगठन में सक्रियता और प्रदेश स्तर तक राजनीतिक पैरोकारी भी महत्वपूर्ण होगी। इसी महीने फैसला होने की उम्मीद पार्टी सूत्रों के मुताबिक, युवा मोर्चा की जिला और महानगर इकाइयों को लेकर इसी महीने फैसला होने की संभावना है। इसके साथ ही दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। अंतिम फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि भाजपा ने इस बार पुराने अनुभव पर भरोसा किया है या युवा मोर्चा में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए उम्र को सबसे बड़ा फिल्टर बनाया है। फिलहाल अलीगढ़ भाजयुमो की दौड़ में सबसे बड़ा सवाल यही है-जातीय समीकरण और पैरोकारी के बीच उम्र का आंकड़ा किसका टिकट काटेगा और किस नए चेहरे की किस्मत खोलेगा?
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