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Allahabad High Court Protest: इलाहाबाद हाईकोर्ट में विरोध प्रदर्शन हिंसक, वकीलों ने फेंके फर्नीचर, अब होगी अवमानना की कार्रवाई
Allahabad High Court Protest: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में बुधवार को वकीलों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान जस्टिस अजय भनोट की अदालत में फर्नीचर फेंका गया और जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए सीसीटीवी फुटेज के जरिए घटना में शामिल लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए। सीसीटीवी फुटेज से होगी पहचान मामले को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने अदालत परिसर में हुए हंगामे को अवमाननापूर्ण बताया। उन्होंने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को सीसीटीवी फुटेज के जरिए घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के निर्देश दिए। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। बैठने की व्यवस्था से शुरू हुआ विवाद विवाद की शुरुआत कोर्ट रूम (Allahabad High Court) में बैठने की व्यवस्था को लेकर हुई थी। बार एसोसिएशन के मुताबिक, अदालत में पुलिस अधिकारियों और दूसरे सीनियर अधिकारियों के बैठने के लिए अलग कुर्सियों की व्यवस्था की जा रही थी। इसी दौरान एक पुलिस अधीक्षक (SP) उस लाइन में बैठ गए, जो आमतौर पर वकीलों के लिए आरक्षित रहती है। आरोप है कि एक वकील ने SP से पीछे की ओर बैठने का अनुरोध किया। इसी बात को लेकर विवाद हो गया। बार एसोसिएशन का दावा है कि इसके बाद एक सरकारी वकील ने संबंधित वकील को फटकार लगाई और जज से उसकी शिकायत की। ये खबर भी पढ़ें: सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3 प्रतिशत बढ़ा, केंद्रीय कैबिनेट ने लगाई मुहर, नवंबर की सैलरी में बढ़कर मिलेगा पैसा ? बार एसोसिएशन ने लगाए गंभीर आरोप 27 अक्टूबर को जारी एक लेटर में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि जस्टिस अजय भनोट ने संबंधित वकील को जेल भेजने की धमकी दी थी। एसोसिएशन के मुताबिक, जब वकील ने माफी मांगने की कोशिश की, तो न्यायाधीश ने कथित तौर पर उसे पुलिस अधिकारी से माफी मांगने के लिए मजबूर किया। लेटर में ये भी आरोप लगाया गया कि सुनवाई के दौरान एक सीनियर वकील का मजाक उड़ाया गया। बार एसोसिएशन ने इन घटनाओं पर आपत्ति जताते हुए चीफ जस्टिस से हस्तक्षेप करने और मामले का संज्ञान लेने की मांग की। अदालत के बहिष्कार की दी थी चेतावनी बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि अगर इन आरोपों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो उसके सदस्य जस्टिस अजय भनोट (Justice Ajay Bhanot) की अदालत का बहिष्कार करेंगे। इसी विरोध के बीच बुधवार को अदालत परिसर में हंगामे और कथित तोड़फोड़ की घटना सामने आई। (UP News) ये खबर भी पढ़ें: 6 सीटों के नतीजे घोषित, BJP ने 4 पर दर्ज की जीत, वाराणसी और आगरा में सपा का कब्जा वकीलों की शिकायत पर क्या बोले पारस नाथ सिंह ? एडवोकेट पारस नाथ सिंह ने कहा कि अदालत के अंदर तोड़फोड़ करना और न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वकीलों की शिकायतें चाहे जो भी हों, उन्हें शारीरिक या मौखिक हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकता है। पारस नाथ सिंह के मुताबिक, बार और बेंच एक ही रथ के दो पहिए हैं और दोनों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
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