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AMU छात्रसंघ के नए नेतृत्व का पहला संदेश:जीत से बड़ी जिम्मेदारी, अब वादे निभाने की बारी, तीनों ने कहा-अब फोकस वायदे पूरे करने पर
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में आठ साल के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद छात्रसंघ की सत्ता में वापसी हुई है। ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद अध्यक्ष नौमान अशरफ, उपाध्यक्ष नसरा नईम और सचिव मोहम्मद हमदान पहली बार मीडिया के सामने आए। तीनों ने अपनी जीत को बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए साफ किया कि अब उनका फोकस चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने और छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल कराने पर रहेगा। किसी ने विरोधियों को भी साथ लेकर चलने की बात कही तो किसी ने कैंपस में बेखौफ होकर आवाज उठाने और नेतृत्व विकसित करने का संकल्प जताया। अध्यक्ष नौमान अशरफ: विरोधियों के भी बनेंगे सचिव, वादों पर खरा उतरने की कोशिश नौमान अशरफ ने कहा कि आठ साल की बड़ी जद्दोजहद के बाद यह निजाम मिला है। यह बहुत खुशी की बात है। आज जश्न में जो शोर-शराबा दिखाई दे रहा है, वह छात्रों की खुशी है। चुनाव के दौरान हमने जो मुद्दे उठाए और जो वादे किए थे, उन सभी पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे। यह हमारे ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मैं तमाम अली बिरादरी और यहां मौजूद सभी छात्रों का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। सभी ने मुझे इतने बड़े अंतर से जिताकर इतिहास दर्ज कराया है। इसके लिए मैं सभी का बेहद शुक्रगुजार हूं। उपाध्यक्ष नसरा नईम: कैंपस में डर नहीं, नेतृत्व और अपनी बात रखने की आजादी होगी नसरा नईम ने कहा कि इतनी बड़ी जीत के साथ उससे भी बड़ी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आई है। मैं खुद को बहुत जिम्मेदार महसूस कर रही हूं। पहले भी सोचते थे कि सत्ता में आने के बाद एक बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी, लेकिन अब इसका दबाव हर दिन, हर मिनट और हर सेकंड महसूस होगा। पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी और पद को निभाने की कोशिश करूंगी। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से ऐसे लीडर निकलें, जिनमें नेतृत्व की क्षमता और जज्बा हो। किसी छात्र को दोबारा नेतृत्व करने या चुनाव लड़ने के बारे में सोचने से पहले हिचकना न पड़े। मैं चार साल से कैंपस में थी। हमेशा लगता था कि जब छात्रसंघ आए तो उसमें ऐसे लोग होने चाहिए, जिनमें नेतृत्व करने का वास्तविक जज्बा हो। जब चुनाव लड़ने वाले सामने आए तो लगा कि नेतृत्व की बात करने वाले वैसे लोग नहीं हैं। इसके बाद मैंने खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह लंबी कहानी है। नसरा ने कहा कि मुझे बहुत सपोर्ट मिला। समाज और छात्रों ने भी मुश्किलें नहीं आने दीं। कुछ परेशानियां जरूर आईं, लेकिन अलहम्दुलिल्लाह, बहुत से लोगों का साथ रहा। आज जो इतिहास रचा गया है, वह अलीगढ़ के एक-एक छात्र की जीत है। मैं अपनी स्पीच में भी कहती थी कि लोगों को नेतृत्व की कल्पना करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैं यह कहना चाहती हूं कि यह स्पेस किसी को मुफ्त में नहीं मिलती, इसे बनाना पड़ता है। मुझे लगता है कि मैंने वह जगह बनाई है और आगे इसे और मजबूत करती रहूंगी। आठ साल में छात्रसंघ नहीं रहा, इस दौरान कई मसले हुए। इससे पहले भी छात्रसंघ के समय समस्याएं होती थीं। हमारी कोशिश होगी कि छात्रों की समस्याएं सबसे पहले प्राथमिकता पर हल हों। उन्होंने कैंपस के माहौल पर कहा कि विश्वविद्यालय की स्पेस दोबारा विश्वविद्यालय जैसी होनी चाहिए। यह ऐसी जगह नहीं बननी चाहिए, जहां लोग अपनी आवाज उठाने और बात रखने से डरें। छात्रों का विकास रुके नहीं, वे आगे बढ़ें और उन्हें अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता न रहे। यही हमारी प्राथमिकता होगी। सचिव हमदान: पक्ष-विपक्ष सभी के लिए काम करूंगा, गलत कार्रवाई वापस होगी मोहम्मद हमदान ने कहा कि जीत जितनी बड़ी है, उससे कहीं ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी मेरे सिर पर है। मैं इसे बखूबी निभाने की कोशिश करूंगा। चुनाव में जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम करूंगा। मैं सिर्फ अपने समर्थकों का नहीं, बल्कि पूरे अलीगढ़ का सचिव हूं। जो लोग मेरे साथ थे, मैं उनका भी सचिव हूं और जो मेरे खिलाफ थे, उनका भी। सभी के हक में काम करूंगा और अदल-ओ-इंसाफ की सियासत की मिसाल पेश करने की कोशिश करूंगा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने मुझे चुना है और मुझ पर भरोसा जताया है। उनके इस भरोसे को कायम रखूंगा। जिन्होंने मेरा साथ नहीं दिया, उनका भी दिल जीतने और उनके लिए काम करने की कोशिश करूंगा। आने वाले दिनों में एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल समेत जिन मुद्दों पर हमारे अधिकार क्षेत्र में काम करना संभव होगा, उन्हें पूरा कराने का प्रयास करेंगे। हमदान ने कहा कि अगर प्रशासन छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है और वह गलत है, तो उसे वापस कराने की कोशिश करेंगे। छात्रों के हितों के लिए हर स्तर पर आवाज उठाना हमारी प्राथमिकता होगी।
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