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AMUSU:नामांकन रद्द होने पर फरहान जुबैरी का धरना-हंगामा:आपराधिक मामलों के चलते फरहान जुबैरी का नामांकन निरस्त, निर्वाचन अधिकारी जावेद तालिब से जमकर नोकझोंक; पीवीसी के आश्वासन पर धरने से उठे
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी फरहान जुबैरी का नामांकन आपराधिक मामलों के चलते निरस्त किए जाने पर शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। नामांकन रद्द होने से नाराज फरहान मुख्य चुनाव कार्यालय पहुंच गए और निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में उनकी निर्वाचन अधिकारी प्रो. जावेद तालिब से तीखी नोकझोंक हुई। फरहान ने सवाल उठाया कि जब चुनाव अधिकारियों ने पहले उनका नामांकन स्वीकार कर लिया और अंतिम सूची में नाम भी शामिल कर दिया तो फिर रातोंरात नाम क्यों काट दिया गया? अधिकारियों ने बताया कि बाद में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी और शिकायत मिलने पर प्रॉक्टर से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर नामांकन निरस्त किया गया। पीवीसी के आश्वासन के बाद फरहान धरने से उठे। उनका कहना है कि वह अपनी दावेदारी बचाने के लिए प्रयासरत हैं। अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो आगे का कदम उठाएंगे। दरअसल, 30 अक्टूबर की रात आठ बजे एएमयू छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की गई थी। इसमें अध्यक्ष पद के प्रत्याशी फरहान जुबैरी का नाम भी शामिल था। इसके बाद उनके आपराधिक मुकदमों को लेकर शिकायत और जानकारी चुनाव अधिकारियों तक पहुंची। बताया गया कि वर्ष 2017 से सितंबर 2023 के बीच फरहान के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कुल 14 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें 12 मुकदमे सिविल लाइंस थाने में दर्ज बताए जा रहे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने प्रॉक्टर से रिपोर्ट मांगी। इसके बाद नामांकन पत्र और संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। देर रात करीब दो बजे फरहान का नामांकन निरस्त कर संशोधित अंतिम सूची जारी कर दी गई। जावेद तालिब से पूछा- पहले नामांकन स्वीकार क्यों किया? शनिवार दोपहर फरहान जुबैरी मुख्य चुनाव कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने निर्वाचन अधिकारी प्रो. जावेद तालिब के सामने अपनी आपत्ति रखी। उन्होंने कहा कि जब नामांकन के समय सभी दस्तावेज जमा कराए गए थे और जांच के बाद उनका नाम अंतिम सूची में शामिल किया गया था तो फिर बाद में नामांकन निरस्त करने की जरूरत क्यों पड़ी? इस पर निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें बताया कि पहली सूची जारी होने के बाद उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर शिकायत मिली और जानकारी सामने आई। इसके बाद प्रॉक्टर से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट और जांच के आधार पर ही संशोधित सूची जारी कर उनका नामांकन निरस्त किया गया। इस जवाब पर फरहान संतुष्ट नहीं हुए। दोनों के बीच काफी देर तक बहस और नोकझोंक होती रही। सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए थे मुकदमे फरहान जुबैरी मूल रूप से बदायूं जिले के इस्लामनगर थाना क्षेत्र के निवासी हैं। वह एएमयू से सोशल वर्क में शोध कर रहे हैं। उनके खिलाफ वर्ष 2017 से सितंबर 2023 के बीच 14 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से जुड़े मामले भी शामिल बताए जाते हैं। विश्वविद्यालय परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शनों और विवादों के दौरान भी फरहान का नाम सामने आता रहा है। इन्हीं मुकदमों और शिकायत के बाद उनकी चुनावी दावेदारी पर सवाल उठे और अंततः नामांकन निरस्त कर दिया गया। पीवीसी के आश्वासन पर धरने से उठे, बोले- अगला कदम उठाएंगे निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पर करीब डेढ़ घंटे तक चले धरने और हंगामे के बीच पीवीसी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने फरहान को समझाया और मामले में जो संभव होगा, उसे देखने का आश्वासन दिया। इसके बाद फरहान धरने से उठ गए। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह अपनी दावेदारी को लेकर प्रयास कर रहे हैं। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी बात नहीं सुनता है तो वह आगे की रणनीति तय करेंगे। फिलहाल नामांकन निरस्त होने के बाद एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
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