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अनूप जलोटा बोले-काशी में अपनी बैटरी चार्ज करने आता हूं:रामायण सम्मान से हुई सम्मानित,राम मंदिर के तर्ज पर बिहार में बनेगा माता सीता का मंदिर
गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर काशी में रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से रामायणी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य और रामायण परंपरा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली देशभर की 28 विभूतियों को सम्मानित किया गया। समारोह में सम्मान प्राप्त करने के बाद पद्मश्री अनूप जलोटा ने काशी से अपने लगाव को साझा किया। उन्होंने कहा कि रामायणी सम्मान प्राप्त करने वाले सभी लोगों में वह भी एक हैं। काशी आने के लिए उन्हें किसी खास अवसर या बहाने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा, “मुझे तो बहाने चाहिए होते हैं काशी आने के। महादेव के दर्शन के बाद और यहां की वायु सांसों में आ जाने से बैटरी चार्ज हो जाती है। बस उसी के लिए हम यहां आते हैं। इसके बाद अनूप जलोटा ने अपने लोकप्रिय भजन ‘ऐसी लागी लगन...’ की प्रस्तुति दी। युवाओं और नई पीढ़ी को दिशा देने की जरूरत : चिंतामणि महाराज कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बेहतर कार्य करने वाले लोगों को लगातार प्रोत्साहन देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवाओं और आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने की जरूरत है। ऐसे सम्मान समारोह समाज में सकारात्मक कार्य करने वाले लोगों को पहचान दिलाने के साथ दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। चिंतामणि महाराज ने कहा कि वह अपने प्रदेश छत्तीसगढ़ में भी रामायणी सम्मान समारोह आयोजित कराने के लिए हरसंभव पहल करेंगे। उनका प्रयास रहेगा कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए बेहतर कार्य करने वाले लोगों को सामने लाकर उनका सम्मान किया जाए। हर जिले से रामायण और संस्कृति के लिए काम करने वालों को सम्मान : अश्विनी चौबे पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की धरती काशी और गोस्वामी तुलसीदास की पावन जयंती से रामायणी सम्मान के आयोजन की शुरुआत होना असाधारण कार्य है। उन्होंने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों का मार्गदर्शन करने वाली परंपरा है। उन्होंने कहा कि देशभर में एक मुहिम चलाकर प्रत्येक जिले से रामायण, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने का प्रयास किया जाएगा। ऐसे लोगों को समाज के सामने लाना जरूरी है, जिन्होंने अपने कार्यों से भारतीय संस्कृति और मूल्यों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। रामायण के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा लें : कुलपति समारोह की अध्यक्षता कर रहे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी ने रामायणी सम्मान समारोह को गौरव का विषय बताया। उन्होंने रामायण रिसर्च काउंसिल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि रामायण के आदर्श केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं रहने चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामायण में निहित जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को दिशा देने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है, जहां भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले लोगों को सम्मान और पहचान मिले। 28 विभूतियों को मिला रामायणी सम्मान रामायणी सम्मान से सम्मानित होने वाली विभूतियों में भजन सम्राट अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल (मुंबई), आर.के. सिन्हा (बिहार), किशोर कुणाल (पटना, मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश (लखनऊ), भगवान दास (नई दिल्ली), डॉ. उदय प्रताप सिंह (वाराणसी), डॉ. अवधी हरि (लखनऊ), योगेश्वर प्रसाद देवरानी (नैनीताल), आदित्य जैन नीमच (मध्य प्रदेश), अभय माणके (इंदौर), संत हरिओम (हाथरस), नरेंद्रनाथ गगन (बिहार), योगेश चंद्र शर्मा-योगी (आगरा), संजीव कुमार (बिहार), डॉ. आशा ओझा (बिहार), मदुगुल्ला प्रफुल्ला (आंध्र प्रदेश), विनोद कुमार तिवारी (झारखंड), डॉ. चंद्र प्रभा मदान (हरियाणा), आचार्य संतोष पांडेय (राजस्थान), अजय याग्निक (दिल्ली), विंध्याचल मणि त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश), राजराधे कृष्ण शर्मा (महाराष्ट्र), प्रेम प्रकाश दुबे (महाराष्ट्र), त्रिलोकी नाथ पांडेय (उत्तर प्रदेश), रामभनी द्विवेदी (उत्तर प्रदेश), डॉ. रविशंकर पांडेय (उत्तर प्रदेश) और रेखा मेहटा (नई दिल्ली) शामिल रहीं।
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