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Babasaheb Patil: मंत्री की कुर्सी पर RBI का फैसला! लातूर के बैंक डायरेक्टर पद से हटाए गए बाबासाहेब पाटिल; क्यों हुआ एक्शन?
RBI Remove Babasaheb Patil: महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र (Cooperative Sector) से इस वक्त की एक जरूरी खबर सामने आ रही है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शनिवार 19 सितंबर 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के कोऑपरेटिव मिनिस्टर बाबासाहेब पाटिल को लातूर डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर के पद से हटा दिया है. यह कार्रवाई लंबे समय तक डायरेक्टर का पद संभालकर कड़े बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करने के कारण की गई. इस फैसले से महाराष्ट्र के राजनीतिक और कोऑपरेटिव हलकों में हलचल मच गई है. क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद लातूर डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के 19 सदस्यों वाले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से जुड़ा है. बैंक के सदस्य और ऑथराइज़्ड वोटर रिप्रेजेंटेटिव सतीश शेषराव जाधव ने 25 मई को रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया में एक फॉर्मल शिकायत दर्ज कराई. अपनी शिकायत में जाधव ने आरोप लगाया कि बैंक के मंत्री बाबासाहेब पाटिल समेत आठ डायरेक्टर्स 10 साल से ज़्यादा समय से लगातार अपने पदों पर बने हुए हैं, जो बैंकिंग नियमों के खिलाफ है. शिकायत करने वालों ने सभी आठ सदस्यों की क्वालिफिकेशन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. आरोपी डायरेक्टर्स की लिस्ट में राज्य के कोऑपरेटिव मिनिस्टर बाबासाहेब पाटिल का नाम खास तौर पर शामिल था. बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद की गई कार्रवाई सतीश शेषराव जाधव ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच का दरवाजा खटखटाया. 3 अगस्त, 2026 को कोर्ट ने RBI को 25 मई की शिकायत के मेरिट पर छह हफ़्ते के अंदर फ़ैसला करने का निर्देश दिया. इसके बाद, आठ में से सात डायरेक्टर्स ने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया, जबकि बाबासाहेब पाटिल ने इस्तीफ़ा नहीं दिया. इसके बाद RBI ने कार्रवाई करते हुए उन्हें डायरेक्टर के पद से हटा दिया. मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने RBI के फ़ैसले पर क्या कहा? नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने RBI के इस कदम पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि 10 साल के कार्यकाल से जुड़ा कानून उनके मामले पर लागू नहीं होता. RBI का फ़ैसला गलत और त्रुटिपूर्ण है, और एक डायरेक्टर के तौर पर वह इस फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे. इस डेवलपमेंट से महाराष्ट्र के पॉलिटिकल और कोऑपरेटिव सर्कल में गरमागरम बहस छिड़ गई है. हालांकि हाई कोर्ट ने अपने अगस्त के ऑर्डर में डायरेक्टर्स की असली डिसक्वालिफिकेशन पर कोई आखिरी नतीजा नहीं निकाला, लेकिन उसने RBI को कंप्लेंट पर फैसला करने का निर्देश दिया.
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