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बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद पर झूठी शिकायत का दावा:संभल में AIMIM नेता शकील बोले- 350 साल पुरानी मस्जिद, बीजेपी में लाभ के लिए सुभाष त्यागी ने शिकायत की
संभल। बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद और मजार को लेकर की गई शिकायत पर बुधवार को विवाद खड़ा हो गया। श्रीकल्कि सेना के सुभाष चंद्र त्यागी ने दावा किया था कि मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की संरक्षित संपत्ति है। वहीं, AIMIM के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी शकील अहमद अशरफी ने शिकायत को गलत बताया है। पुरातत्व विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची शकील अहमद अशरफी ने बुधवार शाम करीब 4 बजे बताया कि एक वकील ने 300 से 350 साल पुरानी मस्जिद और मजार को लेकर शिकायत की थी। शिकायत में दावा किया गया था कि यह जामा मस्जिद की जमीन पर स्थित है और पुरातत्व विभाग के दायरे में आती है। शिकायत मिलने के बाद पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर जांच के लिए पहुंची। अशरफी के मुताबिक, शिकायत में दिया गया प्लॉट नंबर गलत पाया गया और उसका मस्जिद या मजार से संबंध नहीं था। प्लॉट नंबर 116 होने का दावा शकील अशरफी ने बताया कि मस्जिद और मजार का प्लॉट नंबर 116 है, जिसका क्षेत्रफल करीब 2,100 वर्ग मीटर बताया गया है। पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी। उनका दावा है कि जांच में बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद या दरगाह का पुरातत्व विभाग से कोई संबंध नहीं मिला। इसके बाद टीम बिना विस्तृत सर्वे किए वापस लौट गई। शिकायत को लेकर लगाए गंभीर आरोप शकील अशरफी ने आरोप लगाया कि शिकायत में जानबूझकर गलत प्लॉट नंबर दिया गया था। एक अन्य वकील ने भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर प्रचार या राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से शिकायत की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ता सुभाष चंद्र त्यागी का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मुसाफिरखाने को लेकर भी अशरफी का दावा शकील अशरफी ने कहा कि जामा मस्जिद का मुसाफिरखाना वक्फ की संपत्ति है और वह रजिस्ट्री के आधार पर उसके मालिक हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को संभल कोतवाली क्षेत्र में मनोकामना तीर्थ मंदिर की सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे से बने मुसाफिरखाने और तीर्थ स्थल का करीब ढाई घंटे तक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा और 8 ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई।
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