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बंगाल STF के अधिकार क्षेत्र पर हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

📰 Newsprahari 🕐 1 min read 📅 August 26, 2026 👁 1 views
बंगाल STF के अधिकार क्षेत्र पर हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
बंगाल STF के अधिकार क्षेत्र पर हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के तीन विशेष थानों और उनसे जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करते हुए प्रतिवादियों से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने 19 जून को पश्चिम बंगाल सरकार की 30 जनवरी, 31 जनवरी और 10 फरवरी 2025 की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था। इन अधिसूचनाओं के जरिए STF के लिए विशेष थाने बनाए गए थे और उन्हें राज्य के बड़े हिस्से में मामलों की जांच का अधिकार दिया गया था। साल्ट लेक और न्यू जलपाईगुड़ी में बनाए गए थे थाने 30 जनवरी की अधिसूचना के तहत साल्ट लेक और न्यू जलपाईगुड़ी में STF थाने बनाए गए थे। इन थानों को दक्षिण और उत्तर बंगाल के बड़े क्षेत्रों में अधिकार क्षेत्र दिया गया था। इन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS), NDPS एक्ट, आर्म्स एक्ट, UAPA, विस्फोटक अधिनियम, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और PMLA जैसे कानूनों के तहत मामलों की जांच का अधिकार दिया गया था। 10 फरवरी की अधिसूचना के माध्यम से इन STF थानों में दर्ज मामलों की सुनवाई का अधिकार बिधाननगर और सिलीगुड़ी की अदालतों को सौंपा गया था। हाईकोर्ट ने क्षेत्राधिकार व्यवस्था पर उठाए थे सवाल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 197 में निर्धारित क्षेत्राधिकार संबंधी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि कार्यपालिका केवल अधिसूचना के जरिए ऐसी समानांतर न्यायिक व्यवस्था नहीं बना सकती, खासकर तब जब संबंधित विशेष कानूनों में विशेष अदालतों का प्रावधान पहले से मौजूद है। हाईकोर्ट ने यह आशंका भी जताई थी कि इस व्यवस्था से ‘फोरम शॉपिंग’ को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा दूर-दराज के जिलों के शिकायतकर्ताओं और गवाहों को बिधाननगर या सिलीगुड़ी तक पहुंचने में परेशानी होने की बात भी कही गई थी। STF का गठन रद्द नहीं किया था हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह STF के गठन के खिलाफ नहीं था। वर्ष 2019 की अधिसूचना के तहत गठित STF को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी। अदालत का फैसला मुख्य रूप से 2025 में जारी अधिसूचनाओं और उनके तहत तय किए गए थानों तथा अदालतों के अधिकार क्षेत्र तक सीमित था। अब सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद हाईकोर्ट के 19 जून के फैसले का अमल फिलहाल स्थगित रहेगा। अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगे की सुनवाई और उसके निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
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