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बागपत में लेखपालों ने अतिरिक्त हल्कों का बहिष्कार किया:लंबित मांगों के समाधान के लिए ऑनलाइन काम भी बंद किए, मुख्य सचिव को भेजा ज्ञापन
बागपत में उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। संघ के आह्वान पर लेखपालों ने अपने अतिरिक्त हल्कों का बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने इन हल्कों से जुड़े बस्ते तहसील और राजस्व निरीक्षक कार्यालयों में जमा कर दिए हैं। साथ ही लेखपालों ने ऑनलाइन काम भी बंद कर दिए हैं। संघ ने उपजिलाधिकारी के जरिए मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर मांगों पर जल्द कार्रवाई की मांग की है। संघ का कहना है कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की रीढ़ हैं। उन पर लगातार काम का बोझ बढ़ रहा है। इसके बावजूद उनकी कई मांगें सालों से सरकार के पास अटकी हुई हैं। संघ की मुख्य मांगों में अंतर्मंडलीय स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची तुरंत जारी करने की मांग की है। वर्ष 2024 के विभागीय परीक्षा परिणाम और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र भी घोषित करने को कहा गया है। लेखपाल संघ ने स्टेशनरी भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये करने की मांग की है। वाहन भत्ता 1500 रुपये और विशेष भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये हर महीने करने को कहा गया है। भूलेख कार्यालयों और अन्य पटलों से जुड़े लेखपालों को भी मुक्त करने की मांग की गई है। संघ ने ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के लिए जरूरी सुविधाएं मांगी हैं। इनमें पर्याप्त फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली, पीने का पानी, शौचालय और अभिलेख सुरक्षित रखने की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही, लेखपाल संवर्ग का शुरुआती वेतनमान लेवल-5 (2800 ग्रेड पे) करने और वेतन में असमानता खत्म करने की मांग भी रखी गई है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं हुआ, तो ऑनलाइन काम के बहिष्कार समेत आंदोलन को और बढ़ाया जाएगा। संघ ने साफ किया कि उनका मकसद लोगों को परेशान करना नहीं है, बल्कि सालों से अटकी अपनी मांगों का समाधान कराना है।
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