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बीजेपी में केंद्र मंत्री ने तय किया मेयर प्रत्याशी:कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गणित चला; जानिए कैसे तय हुए नाम
अलवर में बीजेपी और कांग्रेस के मेयर प्रत्याशियों के चेहर सामने आ गए हैं। नगर निगम के लिए कुल 3 लोगों ने नामांकन किए हैं। इसमें एक निर्दलीय भी शामिल है। माना जा रहा है कि नामांकन जांच के बाद 2 चेहरे ही बचेंगे। निर्दलीय का नाम कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत सामने किया है। अलवर बीजेपी की प्रत्याशी सुमनलता अग्रवाल के नाम पर आखिरी मुहर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की लगने की चर्चा है। नामांकन के दिन सुबह 6 बजे तीन प्रत्याशियों को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पास ले जाया गया। यहां आने के बाद पार्षद नेहा मनचंदा व पार्षद अपूर्वा शर्मा को वापस कैंप में भेज दिया गया। अलवर में केवल सुमनलता अग्रवाल को लेकर आया गया। इसके बाद दापेहर 1 बजे तक तीनों प्रत्याशियों के घरों पर कोई मैसेज नहीं भेजा गया। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर अजय अग्रवाल के परिवार के साथ वन राज्य मंत्री संजय शर्मा पहुंचे। नाम तय होने की पुष्टि हुई। फिर नामांकन भरा गया। दो दिन से वार्ड 48 की पार्षद नेहा मनचंदा का नाम मेयर प्रत्याशी के रूप में आगे बढ़ा था। इसके पीछे यही गणित लगाया जाता रहा कि अलवर शहर से बीजेपी पुरुषार्थी समाज के पार्षद को मेयर बना सकती है। पहले दो बार बीजेपी ने पुरुषार्थी को ही मेयर का जिम्मा सौंपा है। बाकी सुमनलता अग्रवाल को मेयर प्रत्याशी बनाने के पीछे अजय अग्रवाल का व्यक्तिगत कारण रहा। पूर्व में अजय अग्रवाल बीजेपी से नगर परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं। उनके समय ठीक ठाक काम हुए थे। आमजन में भी अजय अग्रवाल का ज्यादा चर्चा में था। कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गणित चला कांग्रेस के मेयर के प्रत्याशी कमलेश शर्मा के चयन के पीछे राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गणित माना जा रहा है। हालांकि जूली ने अधिकतर फैसले पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की सहमति से लिए हैं। लेकिन इस चुनाव में जूली ने दिन-रात एक कर रखी थी। जीतने वाले पार्षदों को अपने पक्ष में लाने के रात-रातभर घूमे। इससे पहले चुनाव में बागियों को मनाने में जूली लगे रहे। पहले कांग्रेस भी बीजेपी की तरह तीन-तीन के नामांकन भराने की तैयारी कर रही थी। लेकिन जब सुमनलता अग्रवाल का नाम फाइनल हुआ तो कांग्रेस ने कमलेश शर्मा का नाम फाइनल किया। रिंकल गर्ग चुनाव नहीं हारती तो वही प्रत्याशी होती वार्ड 36 से कांग्रेस प्रत्याशी रिंकल गर्ग थी। उसके पति और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के परिवार के गहरे संबंध हैं। ज्वैलर दीपक गर्ग और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पहले कई कामकाज में साथ दिखे हैं। इसलिए यह माना जा रहा था कि रिंकल गर्ग चुनाव जीतती तो कांग्रेस की प्रत्याशी वही होती। लेकिन उनके चुनाव हारने से काफी गणित बदलना पड़ा है। चुनाव हारने के बाद भी रिंकल गर्ग ने मेयर के लिए नामांकन भरा है। नाम वापसी के बाद कांग्रेस का गणित पता चलेगा। वैसे जब रिंकल गर्ग नामांकन करने आई तब उनके साथ कई कांग्रेसी भी आए थे। इसलिए रिंकल को कवरिंग फॉर्म माना जा रहा है। इसलिए नामांकन वापसी की संभावना है। ये भी पढ़ें... अलवर- भाजपा से सुमनलता और कांग्रेस से कमलेश मेयर उम्मीदवार:हारी प्रत्याशी ने निर्दलीय भरा नामांकन, पूर्व सभापति और पूर्व जिलाध्यक्ष की पत्नियों को बनाया प्रत्याशी
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