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बाल विवाह के खिलाफ पंजाब सरकार का कड़ा एक्शन: समय रहते रुकवाई गईं 5 शादियां, निगरानी के लिए तैनात किए गए 2076 अधिकारी

📰 Ni News India 🕐 1 min read 📅 September 3, 2026 👁 2 views
बाल विवाह के खिलाफ पंजाब सरकार का कड़ा एक्शन: समय रहते रुकवाई गईं 5 शादियां, निगरानी के लिए तैनात किए गए 2076 अधिकारी
भारतीय समाज में आज भी कई जगहों पर गहरे तक जड़ें जमा चुकी सामाजिक कुरीतियां बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही हैं। इसी कुप्रथा के खिलाफ पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने बेहद आक्रामक और परिणाम-केंद्रित रुख अपनाते हुए बाल विवाह के खिलाफ अपने अभियान को और अधिक तेज कर दिया है। राज्य सरकार की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और मुस्तैदी का ही नतीजा है कि हाल ही में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में समय रहते त्वरित हस्तक्षेप करते हुए पांच बाल विवाहों को होने से सफलतापूर्वक रुकवा दिया गया है। बाल विवाह जैसी गैर-कानूनी और अमानवीय प्रथा के खिलाफ यह प्रशासनिक सफलता न केवल बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो समाज में इस तरह के अपराधों को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं। राज्य की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने इस पूरे अभियान की जानकारी देते हुए स्पष्ट शब्दों में यह बात दोहराई है कि पंजाब सरकार बच्चों के भविष्य, शिक्षा और उनके कानूनी अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। सरकार का यह स्पष्ट और दृढ़ संकल्प है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को राज्य की धरती पर किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के कुशल नेतृत्व में प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, बाल कल्याण समितियों, बाल विवाह रोकथाम अधिकारियों और अन्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय को बेहद मजबूत बनाया गया है, ताकि किसी भी कोने से सूचना मिलते ही त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जागरूकता अभियानों और 172 शिविरों के जरिए गांवों और कस्बों तक पहुंच रही है सरकार केवल प्रशासनिक सख्ती के बलबूते ही किसी सामाजिक कुरीति को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता, जब तक कि समाज के निचले स्तर तक लोगों की सोच में बदलाव न लाया जाए। इस बात को अच्छी तरह समझते हुए पंजाब सरकार ने दंडात्मक कार्रवाइयों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियानों का रास्ता चुना है। मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि प्रदेश भर में अभी तक कुल 172 जागरूकता शिविरों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों, ग्रामीण पंचायतों, स्कूलों के शिक्षकों, स्थानीय युवाओं, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों को बाल विवाह के कानूनी परिणामों के साथ-साथ इसके स्वास्थ्य संबंधी गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी देना था। कम उम्र में शादी होने से बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभावों से लोगों को अवगत कराया जा रहा है। इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह निषेध अधिनियम (Prohibition of Child Marriage Act) और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी सरल भाषा में दी जा रही है, ताकि समाज का हर वर्ग इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सके। सरकार का मानना है कि बाल विवाह रोकना केवल सरकारी महकमों या पुलिस प्रशासन की अकेली जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक को इसके खिलाफ आगे आकर अपनी आवाज उठानी होगी। इसी उद्देश्य से सरकार ने अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को अपने आस-पास या किसी रिश्तेदारी में बाल विवाह होने की भनक लगती है, तो वे तुरंत राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल करके इसकी सूचना दे सकते हैं या फिर अपने क्षेत्र के नजदीकी बाल विवाह रोकथाम अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं, ताकि समय रहते किसी मासूम की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई जा सके। प्रदेश भर में 2076 अधिकारियों को सौंपी गई बाल विवाह रोकथाम की विशेष जिम्मेदारी बाल विवाह की रोकथाम के इस अभियान को जमीनी स्तर पर पूरी तरह प्रभावी और अचूक बनाने के लिए पंजाब सरकार ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। पूरे राज्य में कुल 2076 जिम्मेदार अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर 'बाल विवाह रोकथाम अधिकारी' (Child Marriage Prohibition Officers) के रूप में नामित किया गया है। इन विशेष अधिकारियों के दायरे में मुख्य रूप से सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य (Principals) और बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) शामिल किए गए हैं। इन अधिकारियों को अपने-अपने इलाकों में स्कूलों, गांवों और शहरी वार्डों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यदि कोई परिवार अपनी नाबालिग बेटी या बेटे की शादी तय करता है, तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंच सके और समय रहते कानूनी रोक लगाई जा सके। सरकार की इस बहुआयामी रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को एक सुरक्षित, सम्मानजनक, भयमुक्त और अधिकार-आधारित बचपन प्राप्त हो सके। पढ़ाई की उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और भविष्य के सपने होने चाहिए, न कि चूल्हा-चौका या पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ। पंजाब सरकार का यह बाल विवाह विरोधी अभियान इस बात का गवाह है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और प्रशासनिक अमला पूरी ईमानदारी से काम करे, तो समाज की पुरानी और दीमक की तरह चाटने वाली कुप्रथाओं को भी सफलतापूर्वक मिटाया जा सकता है। आने वाले दिनों में सरकार इस अभियान को और अधिक व्यापक रूप देने की योजना बना रही है ताकि पंजाब को देश का पहला पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त और सुरक्षित राज्य बनाया जा सके।
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