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बलिया में सवर्ण स्वाभिमान यात्रा, डीएम को सौंपा ज्ञापन:अनशन खत्म कराया, SC/ST एक्ट में संशोधन की मांग
बलिया में बुधवार को सवर्ण स्वाभिमान यात्रा निकाली गई। नगवां स्थित अमर शहीद मंगल पाण्डेय स्मारक परिसर से सुबह करीब 10 बजे बाइक से शुरू हुई यात्रा विभिन्न रास्तों से होते हुए टीडी कॉलेज पहुंची। यहां से ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के पूर्व महामंत्री राहुल मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने पैदल मार्च किया। दोपहर करीब 12:45 बजे वे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए। दोपहर ढाई बजे के बाद धरना आमरण अनशन में बदल गया। डीएम के नहीं पहुंचने पर अनशन का ऐलान राहुल मिश्रा ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से बाहर आकर ज्ञापन लेने का निवेदन किया था। उन्हें बताया गया कि केवल 10 लोग कार्यालय में जाकर ज्ञापन दे सकते हैं। सैकड़ों युवाओं के मौजूद होने के कारण वे तय नहीं कर पाए कि कौन से 10 लोग अंदर जाएं। उन्होंने फिर जिलाधिकारी से बाहर आकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन लेने का आग्रह किया, लेकिन उनके नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई। राहुल मिश्रा के मुताबिक, धरनास्थल से डीएम कार्यालय की दूरी करीब 10 मीटर है। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डीएम के आने तक अनशन जारी रहेगा। शाम पांच बजे डीएम ने लिया ज्ञापन शाम करीब 5 बजे जिलाधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे और ज्ञापन लिया। इसके बाद आमरण अनशन समाप्त हो गया। युवाओं की प्रमुख मांगों में वर्तमान SC/ST एक्ट को रद्द करने या उसमें व्यापक संशोधन करने की मांग शामिल है। उनका कहना है कि इससे कानून के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और सभी को निष्पक्ष न्याय मिल सकेगा। UGC नियमों की समीक्षा की मांग प्रदर्शनकारियों ने UGC द्वारा बनाए गए या प्रस्तावित ऐसे नए नियमों को वापस लेने अथवा उनकी समीक्षा करने की मांग की, जिनसे उनके अनुसार छात्रों और शिक्षकों के शैक्षणिक अधिकारों या अवसरों पर असर पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि नीतियां छात्रों के भविष्य, शिक्षा की गुणवत्ता और समान अवसर को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा पर जोर युवाओं ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर आर्थिक आधार को मुख्य आधार बनाकर आरक्षण लागू करने पर विचार करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि इससे युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकार खत्म करना नहीं है। वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें हर भारतीय नागरिक को समान सम्मान, समान अवसर और निष्पक्ष न्याय मिले।
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