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बेटी की हत्या के आरोपी पति को पुलिस ने दबोचा:पीलीभीत में पूर्व प्रधान समेत 4 हत्याओं का भी आरोप, बेटी को कनपटी पर गोली मारने के बाद था फरार
पीलीभीत के बीसलपुर थाना क्षेत्र के रामपुरा नौगावां गांव में 20 वर्षीय बेटी अंशिका गंगवार की हत्या के आरोपी अजय पाल गंगवार को पुलिस ने शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया। अजय पर गांव के पूर्व प्रधान समेत चार अन्य लोगों की हत्या का भी आरोप है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वारदात शुक्रवार शाम करीब 6 बजे हुई थी। पुलिस के मुताबिक अजय पाल गंगवार शराब के नशे में घर पहुंचा और परिजनों से गाली-गलौज करने लगा। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी और बीए की छात्रा अंशिका ने पिता की शराबखोरी और अभद्रता का विरोध किया। इस पर अजय गुस्से में आ गया। मां श्वेता गंगवार के बीच-बचाव के बावजूद उसने 0.315 बोर का तमंचा निकाला और अंशिका की बाईं कनपटी पर सटाकर गोली मार दी। गोली लगने से अंशिका की मौके पर ही मौत हो गई। 2008 में नाबालिग रहते प्रधान की हत्या का आरोप पुलिस के अनुसार, अजय पाल गंगवार का अपराध की दुनिया से पुराना नाता रहा है। वर्ष 2008 में नाबालिग रहते हुए उस पर गांव के तत्कालीन प्रधान जानकी प्रसाद की हत्या का आरोप लगा था। इसके बाद देवहा नदी पटरी पर अवैध वसूली का विरोध करने वाले वीरेंद्र और छोटेलाल की हत्या में भी उसका नाम सामने आया। जमीन विवाद में हत्या का भी आरोप, गांव में था खौफ वर्ष 2025 में जमीन विवाद में सुरेश की हत्या के मामले में भी अजय पाल गंगवार का नाम सामने आया था। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में करीब 100 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे और उसके भाई के वर्तमान प्रधान होने के चलते उसका काफी दबदबा था। वह करीब तीन महीने पहले ही जेल से बाहर आया था। तीन पुलिस टीमों ने जंगल और नदी किनारे खंगाले बेटी की हत्या के बाद अजय फरार हो गया था। एसपी के निर्देश पर सीओ बीसलपुर राहुल के नेतृत्व में तीन पुलिस टीमें गठित की गईं। टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों, जंगलों और देवहा नदी की पटरियों पर दबिश दे रही थीं। सटीक सूचना पर घेराबंदी कर दबोचा पुलिस के मुताबिक शनिवार शाम करीब 4 बजे सटीक सूचना मिली कि अजय पाल गंगवार एक स्थान पर मौजूद है। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष संजीव कुमार शुक्ला ने गिरफ्तारी की पुष्टि की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विधिक प्रक्रिया पूरी कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया।
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