politics
*चुनाव आयोग के भीतर उठते सवाल और लोकतंत्र की पारदर्शिता*
शैलेंद्र चौहान लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान का आयोजन नहीं है। उसकी विश्वसनीयता उस पूरी प्रक्रिया से बनती है जिसके जरिए मतदाता सूची तैयार होती है, नए मतदाताओं के नाम जुड़ते हैं, अपात्र नाम हटाए जाते हैं और किसी नागरिक को सूची से बाहर किए जाने की स्थिति में उसे अपनी बात रखने का अवसर [...]
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