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डांगावास हत्याकांड की हाईकोर्ट में सुनवाई की मांग:अंबेडकर सोसाइटी, भीम आर्मी ने सीएम के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
डांगावास हत्याकांड में मेड़ता सिटी की विशेष कोर्ट (एससी/एसटी) द्वारा सभी 40 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट में तत्काल अपील दायर कराने की मांग उठी है। डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी राजस्थान और भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर मामले में प्रभावी कानूनी पैरवी और पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। पांच लोगों की हुई थी मौत यह मामला डांगावास में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की कृषि भूमि से जुड़े विवाद से संबंधित है। हिंसक घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। मामले की प्रारंभिक जांच राजस्थान पुलिस ने की थी, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई। 11 साल बाद आया फैसला लगभग 11 वर्षों तक चले न्यायिक विचारण के बाद विशेष कोर्ट ने 5 अगस्त को सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। सोसाइटी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट दलीप बसेर और भीम आर्मी के प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल मेघवाल ने कोर्ट के फैसले पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि वैधानिक उपचार के तहत फैसले को उच्च कोर्ट में चुनौती देना आवश्यक है। जांच की कमियों का उठाया मुद्दा ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कोर्ट के निर्णय में अनुसंधान के दौरान गवाहों के बयानों में विरोधाभास और जांच से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया है। चोट प्रतिवेदनों में चोटों की प्रकृति स्पष्ट नहीं होने जैसी कमियों का भी हवाला दिया गया। संगठनों ने अनुसंधान में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोक सेवकों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत कार्रवाई तथा अभियोजन पक्ष की पैरवी की समीक्षा की मांग की। तय अवधि में अपील की मांग ज्ञापन में राज्य सरकार से सीबीआई और केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित अवधि में हाईकोर्ट में अपील दायर कराने का आग्रह किया गया। साथ ही वरिष्ठ एवं अनुभवी अधिवक्ता की नियुक्ति और पूरी कानूनी प्रक्रिया की वरिष्ठ स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई। पीड़ित परिवारों और गवाहों की सुरक्षा पर जोर संगठनों ने पांच मृतकों के आश्रित परिवारों और गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को तत्काल विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग की। पीड़ित परिवारों और प्रमुख गवाहों का सुरक्षा ऑडिट कर प्रभावी पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा गवाहों को धमकी, दबाव या प्रलोभन से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी आग्रह किया गया। पुनर्वास और बच्चों की शिक्षा के लिए पैकेज ज्ञापन में पीड़ित परिवारों के पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और आजीविका के लिए विशेष पैकेज देने की मांग भी की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा संवेदनशील मामला है। सरकार की ओर से प्रभावी कानूनी पैरवी, सुरक्षा और सहायता मिलने से पीड़ित परिवारों तथा समाज का न्याय व्यवस्था और शासन के प्रति विश्वास मजबूत होगा। इस मौके पर डॉ. महेंद्र कुमार, बूटासिंह, विनोद वामनिया, राजन, कन्हैया, सुनील मेघवाल आदि मौजूद रहे।
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