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Delhi High Court के पूर्व जज पर चलेगा Impeachment? विकास सिंह का बड़ा बयान - 'गलत व्यवहार के दोषी को न मिले पेंशन'

📰 Prabhasakshi 🕐 1 min read 📅 August 13, 2026 👁 4 views
Delhi High Court के पूर्व जज पर चलेगा Impeachment? विकास सिंह का बड़ा बयान - 'गलत व्यवहार के दोषी को न मिले पेंशन'
सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने गुरुवार को कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही को "तार्किक अंजाम" तक पहुंचाया जाना चाहिए। यह बात तब कही गई जब तीन सदस्यों वाली संसदीय जांच समिति ने दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज के सरकारी आवास के स्टोररूम से जले हुए नोट मिलने के मामले में उन पर लगे तीनों आरोपों को सही पाया। पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने कहा कि जब तक महाभियोग की प्रक्रिया संभव है, तब तक जस्टिस वर्मा का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें इस्तीफा देने की अनुमति देने से वे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों के हकदार हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें: क्या आप नहीं चाहते कि लोग स्वस्थ रहें? फूड पैकेट पर सुप्रीम कोर्ट से FSSAI को फटकार सिंह ने कहा मेरी राय में अब जबकि उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर नहीं किया गया है और सही भी है, क्योंकि भले ही उन्हें संविधान के तहत इस्तीफ़ा देने का अधिकार है, लेकिन इस्तीफ़ा तभी प्रभावी होता है जब राष्ट्रपति उसे मंज़ूर करते हैं - तो अगर वे अभी भी जज के तौर पर पद पर बने हुए हैं, तो उन पर महाभियोग चलाया जा सकता है। साथ ही, इस रिपोर्ट को संसद के सामने पेश करके उसी दिन उनके महाभियोग पर चर्चा और वोटिंग भी कराई जा सकती है। सिंह ने आगे कहा कि गलत व्यवहार का दोषी पाए जाने के बाद वर्मा को पेंशन लेने की इजाज़त देना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा उनके इस्तीफ़े को मंज़ूरी न देने के पीछे ठोस वजह है, क्योंकि जैसे ही इस्तीफ़ा मंज़ूर होता है, वे पेंशन वगैरह पाने के हक़दार हो जाते हैं। जबकि, अगर उन पर महाभियोग चलाया जाता है, तो वे पेंशन का अपना अधिकार पूरी तरह खो देते हैं। इसे भी पढ़ें: Justice Yashwant Varma पर संसद के शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है सरकार सिंह ने आगे कहा, अगर किसी जज को इस तरह के गलत व्यवहार के लिए दो बहुत ही उच्च-स्तरीय कमेटियों ने दोषी पाया है और उन्हें पेंशन लेने की इजाज़त दी जाती है, तो यह न्याय का मज़ाक होगा। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि महाभियोग प्रस्ताव को उसके तार्किक अंजाम तक पहुँचाया जाए और उन्हें पद से हटा दिया जाए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय जाँच समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और सीनियर एडवोकेट बी.वी. आचार्य शामिल थे।
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