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एसआई भर्ती-2016 की मैरिट लिस्ट फिर से बनेगी:सरकार को अतिरिक्त पद सर्जित करने होंगे, हाईकोर्ट ने कहा-50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं हो सकता
सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2016 की संशोधित मैरिट लिस्ट फिर से जारी होगी। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा- कैटेगरी वाइज नए सिरे से रिकाउंटिंग करके संशोधित मैरिट लिस्ट जारी करें। दरअसल भर्ती में गैर-अनुसूचित क्षेत्र के कुल 456 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए मात्र 142 पद ही रखे गए थे। जिससे सामान्य श्रेणी का अनुपात 50 फीसदी से काफी कम रह गया। विज्ञापनों में बैकलॉग रिक्तियों का स्पष्ट आधार नहीं था और ओबीसी रिक्तियों को भी बिना उचित कानूनी प्रावधान के कैरी-फॉरवर्ड कर दिया गया। 50 फीसदी की सीमा का पालन करना होगा- कोर्ट जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने कहा- पुनर्गणना में आरक्षण लागू करते समय 50 फीसदी की सीमा और एससी-एसटी की बैकलॉग रिक्तियों के नियमों का कड़ाई से पालन करनी होगी। अदालत ने पूरी प्रक्रिया को 180 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने संशोधित मैरिट लिस्ट में सामान्य और अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पद सृजित करने की स्वतंत्रता दी है। वहीं पहले से नियुक्त किसी भी अभ्यर्थी को सेवा से नहीं हटाने के लिए भी कहा हैं। यह आदेश अदालत ने श्याम सिंह व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिए। भर्ती में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण दिया था अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि आरपीएससी ने 5 अक्टूबर 2016 को एसआई भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था, जिसके बाद 5 दिसंबर 2018 और 23 अगस्त 2019 को भर्ती विज्ञापन संशोधित किया गया। भर्ती में गैर-अनुसूचित क्षेत्र के कुल 456 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए मात्र 142 पद ही रखे गए थेय़ जिससे सामान्य श्रेणी का अनुपात 50 फीसदी से काफी कम रह गया। विज्ञापनों में बैकलॉग रिक्तियों का स्पष्ट आधार नहीं था और ओबीसी रिक्तियों को भी बिना उचित कानूनी प्रावधान के कैरी-फॉरवर्ड कर दिया गया। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और आरपीएससी ने वर्षवार रिक्तियों और अतिरिक्त शपथपत्र के जरिए पद निर्धारण को उचित ठहराने का प्रयास किया, जिसे अदालत ने पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा-सार्वजनिक सेवाओं में आरक्षण की सामान्य सीमा 50 फीसदी की सीमा का कड़ाई से पालन होना चाहिए। सभी पदों पर जुलाई-2021 में हो गई थी नियुक्तियां दरअसल, भर्ती को लेकर 2019 में लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। 1 सिंतबर 2020 को रिजल्ट जारी हुआ था। दिसंबर में हाई कोर्ट ने नियुक्तियां देने पर रोक लगा दी थी। लेकिन जुलाई 2021 में हाईकोर्ट ने रोक हटा ली। जिसके तुरंत बाद आरपीएससी ने नियुक्तियां दे दी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार और आरपीएसी को एक बार नए सिरे से आरक्षण तय करते हुए संशोधित मैरिट लिस्ट निकालनी होगी। वहीं इस मैरिट लिस्ट में सलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त पद सर्जित करने होंगे।
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