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ग्वालियर में फर्जी वसीयत से प्रॉपर्टी हड़पने की कोशिश:नौकरानी समेत 3 पर FIR, संपत्ति को नामांतरण के जरिए हड़पने की रची थी साजिश
ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के भगत सिंह मार्केट स्थित संभाजी राव का बंगला परिसर में करीब 10 हजार वर्गफीट की कीमती संपत्ति को फर्जी वसीयत के जरिए हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अविवाहित मृतका की देखरेख करने वाले कर्मचारी, उसकी पत्नी और नौकरानी ने मिलकर 17 फरवरी 2017 की बैकडेटेड वसीयत तैयार कराई थी। तानावडी, पुणे (महाराष्ट्र) निवासी पीड़ित भाई की शिकायत और पुलिस जांच के बाद मुरार पुलिस ने गुरुवार को आरोपी नौकरानी सहित तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अविवाहित बहन की मौत के बाद देखरेख के लिए रखा था केयरटेकर पुणे निवासी 30 वर्षीय राजेन्द्र कुमार उर्फ विजय कुमार भोंसले ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी अविवाहित बहन तारा भोंसले की 18 जनवरी 2018 को मृत्यु हो गई थी। बहन के निधन के बाद संपत्ति की देखरेख के लिए जितेंद्र शर्मा नाम के व्यक्ति को रखा गया था। लेकिन नीयत बिगड़ने पर जितेंद्र शर्मा, उसकी पत्नी सुनीता शर्मा और केयरटेकर/नौकरानी अंजली भोंसले ने आपस में सांठ-गांठ कर 17 फरवरी 2017 की फर्जी वसीयत तैयार कर ली और कीमती संपत्ति को अपने नाम कराने का प्रयास करने लगे। मौत के 6 साल बाद नामांतरण आवेदन से खुला फर्जीवाड़ा पुलिस की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ। जितेंद्र शर्मा ने फर्जी वसीयत के आधार पर नगर निगम में संपत्ति के नामांतरण (म्यूटेशन) के लिए आवेदन दिया था। जांच में सामने आया कि वसीयत की प्रमाणित प्रति 4 मार्च 2024 को यानी करीब छह साल बाद सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से निकलवाई गई थी। इसके अलावा, नोटरी रजिस्टर का मूल रिकॉर्ड भी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराया जा सका। खुद पत्नी और नौकरानी को ही बना लिया गवाह जांच में सबसे बड़ा संदिग्ध पहलू यह सामने आया कि वसीयत के गवाहों में मुख्य आरोपी जितेंद्र शर्मा की पत्नी सुनीता शर्मा और तारा देवी की देखरेख करने वाली नौकरानी अंजली भोंसले खुद शामिल थीं। तारा भोंसले की मृत्यु के करीब सात साल बाद नामांतरण की प्रक्रिया शुरू करने और संदिग्ध गवाहों के कारण वसीयत की असलियत पर सवाल खड़े हो गए। इनका कहना है इस मामले में जानकारी देते हुए मुरार थाना प्रभारी मैना पटेल ने बताया कि पीड़ित की शिकायत और प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। वसीयत की वैधानिकता और अन्य पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है, जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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