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हाईकोर्ट में 21 जुलाई की घटना पर सुनवाई:अब यूपी पुलिस की इंटेलिजेंस विंग करेगी: IB ने जांच से जताई असमर्थता, कोर्ट ने डीजी इंटेलिजेंस को बनाया पक्षकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 21 जुलाई 2026 को कोर्ट परिसर में हुई घटना को लेकर स्वत: संज्ञान से चल रही जनहित याचिका में बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की जगह अब उत्तर प्रदेश पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग को मामले में गोपनीय जांच कराने की जिम्मेदारी दी है। कोर्ट ने यूपी के डीजी इंटेलिजेंस को इस मामले में पक्षकार बनाने का भी निर्देश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। कोर्ट ने इसे इससे जुड़े अन्य मामलों के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। IB ने कहा- जांच कराना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं मामले की सुनवाई बुधवार को कोर्ट नंबर-1 में चीफ जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान भारत सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडेय ने कोर्ट को बताया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो का काम और उसकी प्रकृति अलग है। इसलिए 28 जुलाई के आदेश के पैराग्राफ 43 में स्थानीय इंटेलिजेंस ब्यूरो कार्यालय को जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे IB अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर मानता है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए अपने पुराने आदेश में बदलाव कर दिया। अब स्थानीय IB कार्यालय के बजाय यूपी पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग के महानिदेशक की निगरानी में गोपनीय जांच कराई जाएगी। डीजी इंटेलिजेंस को बनाया गया पक्षकार कोर्ट ने कार्यालय को निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश के डीजी इंटेलिजेंस को इस मामले में विपक्षी पक्षकार बनाया जाए। कोर्ट में मौजूद सरकारी अधिवक्ता डॉ. वीके सिंह को आदेश की जानकारी डीजी इंटेलिजेंस तक पहुंचाने के लिए कहा गया है। वकीलों से मांगे गए जवाब अभी नहीं आए मामले में कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर कोर्ट ने 28 जुलाई के आदेश में उनसे हलफनामा और जरूरी जानकारी मांगी थी। बुधवार की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि संबंधित अधिवक्ताओं की ओर से अभी तक एफिडेविट और मांगी गई जानकारियां दाखिल नहीं की गई हैं। कोर्ट ने कहा कि इस पहलू पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।
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