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हाईकोर्ट ने नोएडा सीएमओ, मेडिकल अफसर को तलब किया:हाथ से लिखी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर कोर्ट नाराज, 15 सितंबर को पेशी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट हाथ से लिखकर अस्पष्ट रूप में तैयार करने के मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और संबंधित मेडिकल ऑफिसर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी छत्रपाल की जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान पारित किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के काबिल नहीं याची के अधिवक्ता ने मृतका गौरी पाल उर्फ पूजा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की स्पष्ट प्रति दाखिल करने से छूट मांगते हुए आवेदन दिया था, क्योंकि जमानत अर्जी में लगी प्रति पढ़ने योग्य नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि आवेदक इसकी कोई स्पष्ट प्रति पेश नहीं कर सका, इसलिए छूट की अर्जी खारिज कर दी गई और आवेदक को स्पष्ट प्रति दाखिल करने का निर्देश दिया गया। इंजरी रिपोर्ट पठनीय होनी चाहिए रिपोर्ट के अवलोकन में सामने आया कि यह मेडिकल ऑफिसर द्वारा हाथ से भरकर तैयार की गई थी, जबकि कोर्ट पहले ही 20 मार्च 2023 के आदेश में स्पष्ट कर चुका है कि पोस्टमार्टम और इंजरी रिपोर्ट पठनीय होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अब पोर्टल उपलब्ध है, जिस पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इंजरी रिपोर्ट और यौन उत्पीड़न रिपोर्ट तैयार कर अपलोड करना ज़रूरी है, ताकि पुलिस सी सी टी एन एस के माध्यम से इसे देख सके। 15 सितंबर को पेश हों कोर्ट ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर जिले से आए कई मामलों में डॉक्टर खुद प्रोफार्मा हाथ से भरकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जबकि उसे एम ई डी एल ई एस पी आर पर तैयार किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी केवल इसलिए निस्तारित नहीं हुई क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति अस्पष्ट थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को निर्धारित।
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