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जेल में बंद भाई को राखी-बांधते ही बेहोश हुई बहन:होश आने पर लिपटकर रोईं; बॉर्डर पर जवानों को बच्चियों ने बांधा रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन का पर्व पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। झुंझुनूं जिला जेल में भी रक्षा बंधन के मौके पर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंची। सलाखों के पीछे बंद भाई से मिलते ही बहनें बिलख पड़ी। जेल में एक बहन कांपते हाथों से राखी बांधते ही रो पड़ी और बेहोश हो गई, जिसे जेल प्रशासन और साथ आए परिजनों ने संभाला। दरअसल, जिला जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए हॉल में विशेष व्यवस्था की गई थी। यहां मारपीट के मामले में विचाराधीन बंदी मेमर पुत्र बीरबल भाट को राखी बांधने के लिए उसकी बहन जेल परिसर पहुंची। लंबे समय बाद भाई को देखकर बहन रो पड़ी। उसने कांपते हाथों से भाई का तिलक किया, कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और वहीं बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। जेल की महिला स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने उसे संभाला। चेहरे पर पानी के छींटे मारकर उसे होश में लाया गया। होश आते ही भाई-बहन एक-दूसरे से गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़े। हालांकि मुलाकात का समय खत्म होने पर जब बहनों को वापस लौटना पड़ा तो वे रो पड़ी, जिसे देख मौजूद जेल प्रशासन के कर्मचारी भी भावुक हो गए। तस्वीरों में देखिए- भाई से मिलकर रो पड़ी बहन भाई से बोली बहन- फिर ऐसा दिन नहीं आए श्रीगंगानगर जेल में भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रक्षा बंधन का पर्व मनाया गया। बहनें अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर लंबी उम्र की कामना की। जेल की सलाखों से हाथ बाहर निकालकर भाइयों ने बहनों से राखी बंधवाई तो भाई- बहन रो पड़े। इस दौरान बहनें अपने भाइयों से कहती रही कि फिर ऐसी कोई हरकत नहीं करना, जिससे ऐसे दिन देखने पड़े। जवाब में भाइयों ने भी वादा किया कि वे फिर से ऐसा नहीं करेंगे। बॉर्डर पर बच्चियों ने जवानों को बांधी राखी श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात जवानों को छोटी बच्चियों ने राखी बांधी। पृथ्वीसर बीएसएफ पोस्ट पर 23वीं बटालियन के कंपनी कमांडर शिवकुमार सहित सभी जवानों को फरीदसर सब-पोस्ट पर सीमा जन कल्याण समिति, रायसिंहनगर शक्ति केंद्र 22 पीटीडी से पहुंची बहनों और नन्हीं बच्चियों ने राखी बांधी। राखी बंधवाते समय जवानों के चेहरों पर खुशी के साथ भावुकता भी थी। जवानों ने भरोसा दिलाया कि देश की सीमाओं की सुरक्षा उनका सर्वोच्च कर्तव्य है और वे हर परिस्थिति में मजबूती से डटे रहेंगे। वहीं बच्चियों ने परिवार की तरह हमेशा उनके साथ रहेगी।
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