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जनकपुरी देह व्यापार कांड में चार दोषियों को सजा:अलीगढ़ के 20 साल पुराने मामले में फैसला, चारों दोषियों को पांच-पांच साल का कठोर कारावास
क्वार्सी क्षेत्र के जनकपुरी में युवती को साढ़े तीन महीने तक बंधक बनाकर देह व्यापार कराने के करीब 20 साल पुराने मामले में शुक्रवार को अदालत ने दोषियों को सजा सुना दी। अपर जनपद एवं सत्र न्यायालय, कोर्ट संख्या-14 के न्यायाधीश पीके जायंत ने निरंजन सिंह, उसके बेटे रोहित, प्रेमपाल सिंह और भगवती उर्फ झांसी वाली रानी को पांच-पांच साल तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है। मजिस्ट्रेट के सामने पहुंचकर युवती ने खोला था मामला अभियोजन के मुताबिक, 17 दिसंबर 2006 को ऊषा नाम की युवती अपने पिता के साथ तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय एसएम पाठक के पास पहुंची थी। उसने बताया था कि क्वार्सी क्षेत्र के जनकपुरी स्थित एक मकान में उसे करीब साढ़े तीन महीने से जबरन रखा गया और देह व्यापार के लिए मजबूर किया जा रहा है। मौका मिलने पर वह आरोपियों के चंगुल से निकलकर पिता के पास पहुंची और मदद मांगी थी। छापे में मिले थे महिला-पुरुष, रुपये और आपत्तिजनक सामग्री शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मकान पर छापा मारा था। मकान के अलग-अलग कमरों में महिला और पुरुष मिले थे। मुकदमे के दस्तावेजों में मौके से रुपये, मोबाइल फोन और आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी का उल्लेख है। आरोप था कि ग्राहकों से 200 से 500 रुपये तक वसूले जाते थे और रकम का हिस्सा मकान में मौजूद लोगों को दिया जाता था। 17 दिसंबर 2006 को क्वार्सी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया और मामला सत्र न्यायालय पहुंचा। दो महिलाएं हुई थीं बरी, एक आरोपी की हो चुकी मौत मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। अदालत ने निरंजन सिंह, रोहित, प्रेमपाल और भगवती को दोषी ठहराया था, जबकि शकुंतला और सपना वार्ष्णेय को बरी कर दिया था। सुनवाई के दौरान कुछ आरोपियों की पत्रावलियां अलग हुईं और इंद्रा देवी की मृत्यु के कारण उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। करीब दो दशक तक चले इस मुकदमे में अब दोषियों को सजा सुनाए जाने के साथ अदालत की कार्रवाई पूरी हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रमेन्द्र कुमार जैन ने पैरवी की थी।
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