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जयपुर में रेलवे कर्मचारियों ने निकाली रैली, किया प्रदर्शन:स्टाफ कंट्रोल का मुद्दा; कर्मचारियों के तकनीकी काम, पदोन्नति और पदस्थापन पर असर
उत्तर-पश्चिम रेलवे में ट्रेन लाइटिंग (टीएल) और आरएसी यूनिट के स्टाफ के कंट्रोल को लेकर विवाद तेज हो गया है। नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन और उत्तर-पश्चिम रेलवे मजदूर संघ के बैनर तले जयपुर में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। यूनियन ने जयपुर के अलावा अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, हिसार, लालगढ़, श्रीगंगानगर, आबूरोड, रानी, ब्यावर, सिरसा, खातीपुरा, हनुमानगढ़ और भिवानी में प्रदर्शन किया। यूनियन-मजदूर संघ यूनियन कार्यालय से रैली निकालकर रेलवे स्टेशन होते हुए कैरिज-विद्युत डिपो पहुंचे। वहीं यूनियन ने खातीपुरा स्टेशन पर ट्रेन नंबर प्रयागराज सुपरफास्ट (12404) के सामने भी विरोध किया। तकनीकी रूप से कार्यप्रणाली प्रभावित यूनियन महामंत्री मुकेश माथुर का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था के नाम पर टीएल-आरएसी स्टाफ का कंट्रोल सीनियर डीएमई को दिया गया, जबकि रेलवे बोर्ड की पॉलिसी के अनुसार वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक नियंत्रण व्यवस्था को नहीं बदलना है। इसके अलावा इससे तकनीकी रूप से कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, जो कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकती है। वहीं यूनियन का आरोप है कि इससे कर्मचारियों की पदोन्नति और पदस्थापना प्रभावित हो रही है। इस दौरान प्रदर्शन में यूनियन के मंडल अध्यक्ष के.एस. अहलावत, मंडल मंत्री राकेश यादव, नरेंद्र चाहर, गोपाल मीना, राजेश वर्मा, देशराज सिंह, मजदूर संघ के मंडल अध्यक्ष सौरभ दीक्षित, मंडल मंत्री दीपक वर्मा, प्रवीण चौहान, अनवर हुसैन, याकत अली सहित 500 से अधिक रेलकर्मी मौजूद रहे। टीएल और आरएसी क्या है टीएल यानी ट्रेन लाइटिंग यानी कोचों में लाइटिंग, बैटरी और विद्युत सप्लाई से जुड़े काम है। वहीं आरएसी यानी रेफरेशन और एयर कंडीशनिंग यानी एसी कोचों की कूलिंग और संबंधित विद्युत-तकनीकी व्यवस्था संभालना है। यानी बात सिर्फ ‘किस अफसर के अधीन’ का नहीं है, बल्कि गलत कंट्रोल से कर्मचारियों के प्रमोशन, पोस्टिंग और तकनीकी कामकाज तक प्रभावित हो रहे हैं।
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