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जयंत चौधरी के ‘G-4 गन्ना’ बयान पर भड़के गुर्जर नेता:गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले- G-4 गुर्जर भी हो सकता था
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की राजनीति में सामाजिक समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। गत दिनों सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में राष्ट्रीय लोकदल की स्वाभिमान रैली के दौरान जयंत चौधरी ने गन्ने और किसान राजनीति को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। अब उनके एक कथित ‘G-4 गन्ना’ वाले बयान को लेकर गुर्जर समाज की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। शनिवार शाम करीब 6 बजे मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रविन्द्र गुर्जर ने जयंत चौधरी के बयान पर नाराजगी जताते हुए पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ‘G-4’ की बात की जा रही है तो इसमें गुर्जर समाज को भी शामिल किया जा सकता था। उनके इस बयान के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। जयंत चौधरी की सहारनपुर रैली में गन्ना किसानों, गन्ने के भाव और एथेनॉल नीति को लेकर कई मुद्दे उठाए गए थे। जयंत ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चीनी और एथेनॉल को लेकर सवाल उठाने वाले गन्ने के मुद्दे पर स्पष्ट बात नहीं करते। उन्होंने गन्ने के बेहतर भाव और किसानों के हितों को लेकर भी अपना पक्ष रखा। रैली में जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह की विरासत को किसी एक परिवार तक सीमित न बताते हुए किसान समाज के विभिन्न वर्गों का उल्लेख भी किया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पाल, यादव, गुर्जर और जाट समेत विभिन्न किसान समुदायों को इस विरासत का हिस्सा बताया। ऐसे में उनके बयान पर गुर्जर समाज की ओर से आई प्रतिक्रिया को पश्चिमी यूपी के व्यापक सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। चौधरी रविन्द्र गुर्जर की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर आने वाले दिनों में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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