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झांसी के रेलवे DRM ऑफिस में धरने पर बैठे ग्रामीण:बोले-पटरी बिछाने के लिए जमीन ले ली,अब रास्ता नहीं दे रहे, ट्रेन से करेंगे आत्महत्या
झांसी में बुधवार को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर दर्जनों किसान मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय पहुंचे और जमकर हंगामा किया। उनका आरोप था कि झांसी-बीना तीसरी रेल लाइन के लिए उनकी जमीनें लेकर खेतों के बीच से रेलवे ट्रैक तो बिछा दिया गया, लेकिन ट्रैक के दूसरी तरफ जाने के लिए रास्ता नहीं दिया गया। इससे ग्रामीण अपने खेतों और मवेशियों को लेकर दूसरी ओर नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें रास्ता नहीं दिया गया तो वह रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर लेंगे। बाद में डीआरएम ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्या सुनी और समाधान का भरोसा दिया। क्रॉसिंग बंद होने से बढ़ी परेशानी ग्रामीणों ने बताया कि उनकी जमीनें तालबेहट के आम्बारा गांव के करीरा इलाके में हैं। 2017 में तीसरी लाइन के लिए उनकी जमीन अधिग्रहण के बाद यहां से रेलवे ट्रैक निकाल दिया गया और रेलवे क्रॉसिंग को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। ग्रामीण जगदीश प्रसाद ने बताया कि ट्रैक के दोनों तरफ गांव के करीब एक हजार परिवार रहते हैं। ग्रामीणों की खेती की जमीन भी ट्रैक के दोनों ओर है। उन्होंने बताया कि पहले ग्रामीण रेलवे लाइन पार कर आसानी से अपने खेतों तक पहुंच जाते थे। मवेशियों को भी इसी रास्ते से ले जाया जाता था। अब क्रॉसिंग बंद होने के बाद रेलवे कर्मचारी उन्हें ट्रैक पार करने से रोकते हैं और दूसरी तरफ जाने पर भगा देते हैं। इससे ग्रामीणों के सामने खेतों तक पहुंचने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वह वर्ष 2017 से रेलवे अधिकारियों से यहां अंडरपास बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अंडरपास बनने से ग्रामीणों के साथ मवेशियों के आवागमन की समस्या भी दूर हो जाएगी। डीआरएम से नहीं मिलने दिया तो धरने पर बैठे बड़ी संख्या में ग्रामीण डीआरएम से मिलकर अपनी समस्या बताने पहुंचे थे। कार्यालय में कर्मचारियों ने बताया कि डीआरएम मीटिंग में व्यस्त हैं और ग्रामीणों को गुरुवार को आने के लिए कहा गया। इससे ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। वह डीआरएम कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए और रास्ता नहीं मिलने पर रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने की चेतावनी देने लगे। काफी देर तक समझाने के बाद डीआरएम ने ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी पूरी समस्या सुनी। उन्होंने ग्रामीणों को समस्या के निस्तारण का भरोसा दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
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