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झांसी में मुकबधिरों का प्रदर्शन, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन:हर विभाग में अनुवादक की तैनाती की मांग, बस स्टाफ को भी साइन लैंग्वेज सिखाएं
झांसी में अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर बुधवार को विकास भवन में आयोजित बैठक में सूचना दिए जाने के बावजूद कई अधिकारी नहीं पहुंचे। इससे नाराज मूकबधिरों ने बैठक के बाद जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की। उन्होंने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर जिलाधिकारी को 21 सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा। मूकबधिरों के साथ आए अनुवादक ने कहा कि समाज के दूसरे नागरिकों की तरह मूकबधिर भी समान अधिकार चाहते हैं, लेकिन भाषा की समस्या के कारण उन्हें कई सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है। महारानी झांसी एसोसिएशन ऑफ द डेफ संस्था की ओर से विकास भवन में अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर बैठक आयोजित की गई थी। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संतराम पेंटर ने बताया कि जिला दिव्यांग सशक्तिकरण अधिकारी की ओर से पत्र जारी कर संबंधित अधिकारियों को बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया था। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला पूर्ति अधिकारी पहुंचे। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला समाज कल्याण अधिकारी और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी बैठक में मौजूद नहीं रहे। मूकबधिरों का कहना था कि इन अधिकारियों से जुड़े विभागों से संबंधित कई समस्याएं उन्हें बैठक में बतानी थीं। अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर उन्होंने नाराजगी जताई और बैठक के बाद डीएम कार्यालय पहुंच गए। हर विभाग में अनुवादक की तैनाती की मांग राजस्थान के जयपुर से आए सांकेतिक भाषा अनुवादक लकी मीणा ने मूकबधिरों की मांगों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हर सरकारी विभाग में सांकेतिक भाषा के एक अनुवादक की तैनाती होनी चाहिए, ताकि मूकबधिर लोगों को अपनी बात रखने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी न हो। उन्होंने बसों में भी साइन लैंग्वेज की सुविधा देने की मांग की। इसके लिए बस कंडक्टरों को सांकेतिक भाषा में बातचीत करने की ट्रेनिंग देने की बात कही। उन्होंने कहा कि मूकबधिर लोगों के पास आवाज नहीं है, लेकिन वे भी देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें समाज के दूसरे नागरिकों के समान अवसर और अधिकार मिलने चाहिए।
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