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किचन में मिलावट का खेल! Everest और Lalji Godhu की Hing पर FSSAI का कड़ा एक्शन
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने लैब टेस्ट में घटिया पाए जाने के बाद एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स और लालजी गोधू की हींग की बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी है। कंपनियों को नियमों के उल्लंघन के बारे में सफाई देने और यह बताने के लिए एक्शन प्लान जमा करने का निर्देश दिया गया है कि वे तय मानकों का पालन कैसे करेंगी। उन्हें बाजार में मौजूद घटिया प्रोडक्ट्स को खुद से वापस मंगाने की सलाह भी दी गई है। जब तक वे नियमों का पालन नहीं करतीं, तब तक यह रोक लागू रहेगी। इसे भी पढ़ें: भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा: आर्थिक निवेश, सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक संघ नेटवर्क का विस्तार FSSAI ने एवरेस्ट के एग करी मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाला में भी नियमों का पालन न किए जाने की बात पाई है। हालांकि, इन तीनों प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। FSSAI ने एक बयान में कहा कि ग्राहकों की शिकायत के बाद उसने हींग के बड़े ब्रांड्स की निगरानी शुरू की। मुंबई में कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और गुजरात के उमरगाँव में एवरेस्ट की यूनिट से लिए गए सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। मौजूदा नियमों के अनुसार, कंपाउंडेड हींग में कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल में घुलनशील अर्क (extract) होना चाहिए। फ़ूड सेफ़्टी रेगुलेटर ने बताया कि जाँच में सैंपल में केवल 0 से 3 प्रतिशत ही अर्क मिला, जिससे पता चलता है कि बनाने वाले ज़रूरत से 30 से 40 प्रतिशत कम कच्ची हींग का इस्तेमाल कर रहे थे। लालजी गोधू यूनिट से इकट्ठा की गई कच्ची हींग की छह किस्मों में 15 से 32 प्रतिशत स्टार्च पाया गया, जो कि तय अधिकतम सीमा 1 प्रतिशत से कहीं ज़्यादा है। इसे भी पढ़ें: Nitin Nabin का सख्त रुख: Sajjan Kumar को श्रद्धांजलि देने वाले 3 BJP MPs को लगाई फटकार यह कदम तब उठाया गया है जब FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने ज़्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट वाले पैक्ड फ़ूड के पैकेट के सामने की तरफ़ एक चमकीले लाल रंग का, छह कोनों वाला (हेक्सागोनल) वॉर्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा पैकेट के सामने वॉर्निंग लेबल लगाने में देरी को लेकर FSSAI और सरकार को फटकार लगाने के कुछ दिनों बाद पेश किया गया।
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