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कांग्रेस का 17-साल पुराना 'गढ़' ढहा, 'बॉबी' बने बाड़मेर सभापति:टिकटों में खींचतान, अलग-अलग बाड़ेबंदी और आपसी फूट से भाजपा ने छीनी सीट
बाड़मेर नगर परिषद में 17 साल बाद भाजपा ने कांग्रेस का 'गढ़' ध्वस्त कर दिया। लगातार तीन बार नगर परिषद का बोर्ड बनाने वाली कांग्रेस इस बार दौड़ में पिछड़ गई। आपसी फूट और गुटबाजी के चलते भाजपा ने यहां संगठित होकर चुनाव लड़ा और स्पष्ट बहुमत लेकर आई। भाजपा ने 17 साल बाद नगर परिषद में बोर्ड बनाया है। भाजपा के गौतम बॉबी 13वें सभापति बने। बॉबी ने कांग्रेस के जयमल सिंह को 15 वोटों से हराया। कांग्रेस के एक पार्षद की ओर से क्रॉस वोटिंग भी की गई। बता दें कि चुनाव में बीजेपी 29 और कांग्रेस 21 और 5 निर्दलीय पार्षद जीते थे। इसके बाद भी कांग्रेस प्रत्याशी को 20 वोट ही मिले। सगुटबाजी के कारण क्रॉस वोटिंग हुई, जिसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। पूर्व विधायक की घर वापसी के साथ दो धड़ों में बंटी कांग्रेस पूर्व विधायक मेवाराम जैन की कांग्रेस में घर वापसी के साथ ही पार्टी के अंदर विरोध शुरू हो गया था। इसके बाद कांग्रेस दो धड़ों में बंटी नजर आई। पूर्व विधायक ने अपने समर्थकों के साथ जयपुर में जाकर शक्ति प्रदर्शन किया। वहां पर गुटबाजी को लेकर कांग्रेस को नुकसान की बात कहीं थी। बावजूद इसके प्रदेश स्तर के नेता बाड़मेर में गुटबाजी खत्म नहीं कर पाए। इसके चलते नगर निकाय में उम्मीदवारों को टिकट लेकर भी खींचतान हुई। टिकटों को लेकर खींचतान कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा ने पूर्व विधायक मेवाराम जैन को तोड़ निकालते हुए मांगीलाल जैन (वडेरा) को चुनाव प्रबंधन कमेटी का संयोजक बनाया। इसके बाद ऑनलाइन फॉर्म लेने के साथ ऑफलाइन फॉर्म लिए गए। टिकट को लेकर पहली सूची जारी की गई। लेकिन विरोध को देखते हुए लिस्ट को होल्ड पर कर दिया गया। इसके करीब तीन-चार घंटे बाद संशोधित सूची जारी की गई। पूर्व विधायक मेवाराम जैन पूर्व उपसभापति सुरतानसिंह को टिकट दिलाना चाहता था, लेकिन उनको टिकट नहीं दी गई। इससे बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक नहीं दिखे एक मंच नगर निकाय चुनाव में पूर्व विधायक मेवाराम जैन और जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा चुनाव प्रचार-प्रसार के दौरान एक मंच पर नजर नहीं आए। हालांकि चुनाव प्रबंधन कमेटी के संयोजक मांगीलाल वडेरा ने एक मंच पर सभाएं और कार्यालयों को उद्घाटन किया। जिलाध्यक्ष मीडिया से कहते रहे कि जहां जिनको मेरी जरूरत थी, वहां पर गया हूं और सभाएं भी की है। बाड़ेबंदी भी अलग-अलग की गई वोटिंग के बाद पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने अपने प्रत्याशी और निर्दलीयों की बाड़ेबंदी की। वहीं, जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा ने कांग्रेस के प्रत्याशियों को अलग जगह पर बाड़ेबंदी की गई है। जब कांग्रेस बहुमत से दूर हो गई। पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने कांग्रेस और निर्दलीय जीते पार्षदों को बाड़ेबंदी से फ्री कर दिया। इसके बाद कई हारे पार्षदों ने बयान भी दिए कि गुटबाजी के चलते हम लोग हारे हैं। पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष की अलग-अलग कॉन्फ्रेंस रिजल्ट की घोषणा के बाद पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाए कि टिकटों का वितरण गलत किया गया। खुद के वार्ड की टिकट भी मेरे से पूछ कर नहीं दी। वहीं जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा ने कहा कि 45 टिकट उनके अनुसार ही दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 निर्दलीय किसने खड़े किए। वहीं संयोजक मांगीलाल वडेरा ने कहा- मेवाराम जैन खुद अपने आपको स्टार प्रचारक कहते है। वो ही जैन वार्डो को नहीं जीता पाएं। जिले के अन्य निकायों में भी भाजपा का प्रदर्शन सिणधरी: भाजपा की चंपादेवी ने अध्यक्ष पद जीता। उन्हें 14 और कांग्रेस के भंवराराम को 6 वोट मिले। निर्दलीय पृथ्वीराज को एक भी वोट नहीं मिला। 20 वार्ड वाली सिणधरी नगरपालिका की चंपादेवी पहली अध्यक्ष बनीं। गुड़ामालानी: भाजपा की शीतल जैन अध्यक्ष बनीं। भाजपा के 11, कांग्रेस के 7 और निर्दलीयों के दो पार्षद थे। मतदान में शीतल जैन को 13 और कांग्रेस की कल्पना शेखावत को 7 वोट मिले। समदड़ी: भाजपा के सुरेश कुमार ने अध्यक्ष पद जीता। उन्हें 17 और कांग्रेस के विक्रम बुनकर को 8 वोट मिले। यहां भाजपा के 14, कांग्रेस के 8 और निर्दलीय के 3 पार्षद जीते थे। कांग्रेस के पूर्व मंत्री गोपाराम मेघवाल के बेटे को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। धोरीमन्ना: नई नगर पालिका में कीर्ति गोसाईवाल निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं। चौहटन: भाजपा के रूपसिंह निर्विरोध अध्यक्ष बने। यहां भाजपा के 11 और निर्दलीय 9 पार्षद जीते थे। निर्दलीयों ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन दे दिया। कांग्रेस यहां अपना खाता नहीं खोल सकी। तस्वीरों में देखिए- कहां कौन रहा विजेता
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