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कार्यकर्ताओं की राय से तय होगा कांग्रेस जिलाध्यक्ष का नाम:AICC सचिव बोले- दिल्ली-लखनऊ से सीधे नहीं होगी नियुक्ति, 30 अगस्त तक पर्यवेक्षक भेजेंगे रिपोर्ट
कासगंज में कांग्रेस ने जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब जिलाध्यक्षों की नियुक्ति सीधे दिल्ली या लखनऊ से नहीं होगी, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की राय और फीडबैक को प्राथमिकता दी जाएगी। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और छत्तीसगढ़ के सह प्रभारी विजय जांगिड़ ने यह जानकारी दी। विजय जांगिड़ ने बताया कि कांग्रेस ने प्रत्येक जिले में पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। ये पर्यवेक्षक संबंधित जिलों में पहुंचकर ब्लॉक, मंडल, शहर और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से संवाद करेंगे। संगठन को मजबूत करने वाले संभावित नामों को लेकर उनकी राय और फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट तैयार कर AICC को भेजेंगे। जिलाध्यक्ष पद के लिए मिले सुझावों और फीडबैक की रिपोर्ट 30 अगस्त तक AICC को भेजी जानी है। इसके बाद पार्टी स्तर पर विचार-विमर्श कर जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा की जाएगी। SC, ST, OBC और महिलाओं को प्रतिनिधित्व पर जोर जांगिड़ ने कहा कि नई प्रक्रिया में संगठन के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष जोर रहेगा। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिला वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बना रहे। उन्होंने बताया कि जिलाध्यक्ष पद के लिए ऐसे कार्यकर्ता को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसकी कांग्रेस संगठन में कम से कम पांच साल की सक्रिय भूमिका रही हो। पार्टी का लक्ष्य जमीनी स्तर पर सक्रिय और कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्य नेतृत्व को आगे बढ़ाना है।
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