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खेत की सीमा विवाद में 13 साल बाद फैसला:अलग-अलग धाराओं में 7 आरोपियों को 7-7 साल की कठोर सजा, जुर्माना भी लगाया
नागौर में खेत की सीमा को लेकर हुए विवाद में 13 साल पुराने मारपीट के मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायालय जायल ने 7 आरोपियों को दोषी मानते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सभी आरोपियों पर अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया। फैसला न्यायाधीश विकास राम चौधरी ने सुनाया। सजा के बाद सभी सात आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया। परिवादी ने 2013 को दर्ज कराई थी रिपोर्ट अपर लोक अभियोजक हरीश पारीक के अनुसार मामला जायल थाना क्षेत्र के दुगस्ताऊ गांव का है। परिवादी घनाराम पुत्र भैरूराम ने 6 जुलाई 2013 को पुलिस थाने में रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक शाम करीब 6 बजे मौजा दुगस्ताऊ के खसरा नंबर 1220 की सीमा पर लगी तारबंदी और पत्थर की पट्टियों को आरोपी एकत्र होकर लाठी, कर्सी और कुल्हाड़ियों से तोड़ रहे थे। भैराराम ने उन्हें ऐसा करने से मना किया तो आरोपी बाड़ी में घुस गए और भैराराम सहित बचाव करने आए लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में हनुमानराम गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसे उपचार के लिए पहले नागौर और बाद में जोधपुर रेफर किया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के बाद 10 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में न्यायालय में चालान पेश किया। 26 गवाह और 87 दस्तावेज पेश किए मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 26 गवाहों के बयान करवाए गए और 87 दस्तावेज न्यायालय में प्रदर्शित किए गए। अनुसंधान के दौरान जब्त किए गए 5 हथियारों पर भी आर्टिकल लगाए गए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से 2 गवाहों के बयान और 15 दस्तावेज पेश किए गए। मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों बलराम, नरपत और हड़मान की मृत्यु हो गई, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त हो गई। इसके बाद शेष सात आरोपियों जगदीश, कानाराम उर्फ दिलीप, मनफूल, लेखराम, हरेन्द्र, संपत और दिनेश के खिलाफ सुनवाई जारी रही। हत्या के प्रयास की धारा में भी दोषसिद्ध न्यायालय ने सातों आरोपियों को 7 अलग-अलग धाराओं में 7 आरोपियों को 7-7 साल की कठोर सजा, जुर्माना भी लगाया गया जिसमें एक साथ किसी के घर में घुसने, धारदार हथियार से चोट पहुंचाने सहित मारपीट करने के मामले में सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक हरीश पारीक ने पैरवी की, जबकि परिवादी की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश गुलफगर ने पक्ष रखा। फैसला आने के बाद सभी दोषी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर कारागृह भेज दिया गया।
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