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*लोकतंत्र की चौखट पर उभरता गुंडा-तंत्र*
(क्या संवैधानिक संस्थाओं की कमजोरी नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए खतरे की घंटी है?) – TEJPAL SINGH ‘TEJ’ लोकतंत्र केवल चुनावों का नाम नहीं है। लोकतंत्र उस व्यवस्था का नाम है जिसमें सत्ता से प्रश्न पूछने का अधिकार सुरक्षित हो, असहमति को देशद्रोह न माना जाए, विरोध करने वाले नागरिकों को अपराधी न समझा जाए और कानून सबके [...]
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