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Lord Jagannath Land: पाकिस्तान के सिंध में भी भगवान जगन्नाथ की जमीन! देश-विदेश में संपत्तियों का होगा सत्यापन, 2 साल में सेटलमेंट का लक्ष्य
Lord Jagannath Property: भगवान श्री जगन्नाथ की जमीन और संपत्तियों को लेकर ओडिशा सरकार ने अब व्यापक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का फोकस सिर्फ ओडिशा में मौजूद मंदिर की जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में मौजूद श्री जगन्नाथ की संपत्तियों का भी रिकॉर्ड खंगाला जाएगा. कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंदिर प्रशासन की जमीन, रिकॉर्ड, अतिक्रमण और भूमि से जुड़े लंबित मामलों पर चर्चा हुई. सरकार का कहना है कि श्री जगन्नाथ के नाम पर मौजूद संपत्तियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने के साथ-साथ जमीन से जुड़े विवादों और कब्जे के मामलों का भी समाधान किया जाएगा. करीब 58 हजार एकड़ अचल संपत्ति होने की जानकारी सरकारी जानकारी के मुताबिक, महाप्रभु श्री जगन्नाथ के नाम पर करीब 58 हजार एकड़ अचल संपत्ति होने की जानकारी है. इसमें से लगभग 36 हजार एकड़ जमीन की पहचान की जा चुकी है और उसके अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध हैं. अब सरकार ऐसी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा तैयार करना चाहती है, ताकि यह साफ हो सके कि जमीन कहां-कहां है, उसका वर्तमान इस्तेमाल क्या है और किन जमीनों पर अतिक्रमण या विवाद है. कानून मंत्री के मुताबिक, पहचानी गई जमीन में करीब 25 से 26 फीसदी हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है. हालांकि, सरकार हर कब्जे के मामले में एक जैसी कार्रवाई नहीं करेगी. ऐसे लोग जो कई दशकों से किसी जमीन पर रह रहे हैं, जिनका नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और जो जमीन का किराया भी देते रहे हैं, उनके मामलों को नियमों के तहत अलग तरीके से देखा जाएगा. 2019 में लैंड सेटलमेंट पॉलिसी में बदलाव की हुई थी कोशिश मंत्री ने बताया कि करीब एक सदी से इस तरह के भूमि मामलों का समाधान चुनौती बना हुआ है. वर्ष 2003 में यूनिफॉर्म लैंड पॉलिसी लाई गई थी, लेकिन उसका अपेक्षित तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो सका. इसके बाद 2019 में लैंड सेटलमेंट पॉलिसी में बदलाव की कोशिश हुई, लेकिन वह प्रक्रिया भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई. इस वजह से बड़ी संख्या में मामले लंबित रह गए. अब सरकार ने इस दिशा में नया कदम उठाया है. तटीय इलाकों में श्री जगन्नाथ की जमीन पर लंबे समय से रह रहे लोगों के मामलों के लिए 2026 में महाप्रभु श्री जगन्नाथ लैंड सेटलमेंट रूल लाया गया है. कई स्तरों पर विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए इस नियम को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है. नियमों के मुताबिक, 2019 से पहले से जमीन पर 12 साल या उससे अधिक समय से रह रहे पात्र लोगों को अपने कब्जे का प्रमाण देने और निर्धारित शर्तें पूरी करने पर रियायती दर पर जमीन के सेटलमेंट का मौका दिया जा सकता है. सरकार ने पूरी प्रक्रिया को दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है. यानी एक तरफ पात्र और लंबे समय से रह रहे लोगों के मामलों का कानूनी समाधान किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर ऐसे कब्जों के खिलाफ कार्रवाई होगी, जिन्हें नियमों के तहत अवैध पाया जाएगा. कानून मंत्री के किस बयान की हो रही सबसे ज्यादा चर्चा? इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कानून मंत्री के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में भी भगवान श्री जगन्नाथ के नाम पर जमीन होने की जानकारी होने की बात कही है. मंत्री के अनुसार, ऐसी जमीन किसी श्रद्धालु द्वारा दान में दी गई हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों, जिनमें पंजाब, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल हैं, वहां भी श्री जगन्नाथ के नाम पर संपत्तियां होने की जानकारी है. अब सरकार ऐसी जमीनों की वास्तविक स्थिति, रिकॉर्ड और वर्तमान स्वामित्व की जानकारी जुटाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कह रही है. इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि पाकिस्तान के सिंध में श्री जगन्नाथ के नाम पर मौजूद बताई जा रही जमीन आखिर कहां स्थित है, उसका कितना क्षेत्रफल है और मौजूदा रिकॉर्ड में उसकी क्या स्थिति है. श्री जगन्नाथ की संपत्तियों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है. देवी प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि महाप्रभु की जमीन केवल पुरी या ओडिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी ऐसी संपत्तियां मौजूद हैं. भगवान की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी उनका आरोप है कि कई जगहों पर महाप्रभु की जमीन पर कब्जा कर उसे दूसरे लोगों को बेचे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. उनका कहना है कि भगवान की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. उनके मुताबिक, अगर इन जमीनों से होने वाली आय मंदिर के विकास और महाप्रभु की सेवा में इस्तेमाल होती है तो यह सकारात्मक कदम होगा. लेकिन जमीन पर कब्जा कर निजी लाभ कमाना या उसे कम कीमत पर आगे बेच देना गंभीर चिंता का विषय है. श्री जगन्नाथ की जमीन के मामले में सरकार के सामने मुख्य रूप से दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली—मंदिर की जमीन की पहचान कर उसे अतिक्रमण से मुक्त कराना और मंदिर प्रशासन के नियंत्रण में वापस लाना. दूसरी—दशकों से जमीन पर रह रहे ऐसे लोगों के मामलों का नियमों के तहत निपटारा करना, जो सेटलमेंट के लिए पात्र हो सकते हैं. अवैध कब्जे पाए जाने पर की जाएगी कार्रवाई राजस्व और कानून विभाग मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे. पात्र लोगों को नियमों के तहत राहत मिल सकती है, जबकि अवैध कब्जे पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी. सरकार का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि श्री जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना और भविष्य के लिए उनका बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना भी है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि ओडिशा सरकार देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ पाकिस्तान के सिंध में बताई जा रही श्री जगन्नाथ की संपत्ति की जानकारी को किस तरह सत्यापित करती है और क्या आने वाले दो वर्षों में इन जमीनों से जुड़े लंबित मामलों का वास्तव में समाधान हो पाता है. (ओडिशा से अक्षय महाराणा की रिपोर्ट)
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