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मुझे भविष्य की भाषा बनाओ, हिंदी कह रही हमसे
मेरे प्यारे युवा साथियो, मेरी जेन जी, तुमसे ही मेरी सबसे बड़ी उम्मीद है। मैं तुमसे अंग्रेजी या किसी दूसरी भाषा को छोडऩे की कोई जिद नहीं करती। शौक से दुनिया की हर भाषा सीखो। अंग्रेजी तुम्हें विश्व से जोड़े, फ्रेंच, जर्मन, जापानी या कोई और भाषा तुम्हारे लिए ज्ञान और अवसर के नए द्वार खोले, मुझे इस बात पर बहुत गर्व ही होगा। बस तुमसे मेरी एक ही विनती है। दुनिया की बड़ी खिड़कियां खोलते-खोलते अपने घर का मुख्य दरवाजा मत भूल जाना। वह अपना घर मैं ही हूं। कभी किसी दूर देश में किसी अनजान व्यक्ति के मुंह से अचानक ‘नमस्त’ सुनना या अपनी मिट्टी का कोई परिचित शब्द सुनते ही तुम्हारे चेहरे पर जो सहज मुस्कान आएगी, वही तुम्हें बताएगी कि भाषा केवल अक्षरों का निर्जीव समूह नहीं होती। भाषा मिट्टी की सोंधी खुशबू है। भाषा स्मृतियों की अनमोल गठरी है। भाषा अपनेपन की सच्ची पहचान और घर लौटने की इकलौती राह है।
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