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मैनपुरी में जमीन विवाद पर डीएम की पहल:बोले- जमीन खरीदने से पहले स्वामित्व-कब्जा जांचना खरीदार की जिम्मेदारी, अंतिम फैसला कोर्ट करेगा
मैनपुरी के कुरावली तहसील के मौजा नगरिया में गाटा संख्या 276 और 277 की जमीन को लेकर चल रहे विवाद को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने ‘मिशन समाधान’ के तहत मौके पर पहुंचकर विवादित भूमि का निरीक्षण किया और अधिकारियों से जमीन से जुड़े राजस्व अभिलेखों व पूर्व में हुई पैमाइश की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान डीएम ने विवादित भूमि पर बनी नींव, बाउंड्रीवॉल और अन्य निर्माण को देखा। मौके पर सामने आया कि जमीन के एक हिस्से पर अलका जैन पत्नी जितेंद्र जैन उर्फ राका का कब्जा है और वहां नींव व बाउंड्रीवॉल बनी हुई है। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से बैनामे के आधार पर भूमि पर अधिकार का दावा किया जा रहा है। इसके चलते स्वामित्व, कब्जे और वास्तविक पैमाइश को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। बैनामे से पहले रिकॉर्ड जांचना खरीदार की जिम्मेदारी डीएम ने जमीन खरीदने वाले पक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी भूमि का बैनामा कराने से पहले उसके स्वामित्व, कब्जे, पैमाइश और राजस्व अभिलेखों की जांच करना खरीदार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति से भूमि खरीदी गई है, उससे संबंधित विवाद का समाधान संबंधित पक्ष अपने स्तर से अथवा सक्षम न्यायालय के माध्यम से कराए। विवाद में मानसी पाठक पुत्री अवनीश पाठक निवासी सुजरई और सुखेन्द्र प्रताप सिंह पुत्र कृपाल सिंह निवासी जीवालाल कॉलोनी, मैनपुरी की ओर से बैनामे के आधार पर दावा किया गया है। डीएम ने अधिकारियों को पूर्व की पैमाइश, बैनामा, कब्जे और राजस्व अभिलेखों का मिलान कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। मौके की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के निर्देश जिलाधिकारी ने विवादित भूमि पर मौजूद निर्माण, नींव, बाउंड्रीवॉल और आसपास की जमीन की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी कराने को कहा, ताकि राजस्व अभिलेखों के साथ मौके की वास्तविक स्थिति का भी मिलान किया जा सके। दाखिल-खारिज की कार्रवाई में दोनों पक्षों के दावों और आपत्तियों की विधिवत जांच करने के निर्देश भी दिए गए। स्वामित्व का अंतिम फैसला सिविल कोर्ट में डीएम ने स्पष्ट किया कि भूमि के स्वामित्व और कब्जे का अंतिम निर्णय सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अधिकार निर्धारित करा सकते हैं। प्रशासन की ओर से राजस्व रिकॉर्ड, पुरानी पैमाइश और मौके पर कब्जे व निर्माण की स्थिति को जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान एसडीएम घिरोर, एसडीएम कुरावली पीयूष कुमार जायसवाल, प्रदीप कुमार सिंह, तहसीलदार घिरोर गौरव, अनुज कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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