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MP में ‘फॉलन आउट’ पर बढ़ी अतिथि विद्वानों की लड़ाई, दिग्विजय सिंह से मिला प्रतिनिधिमंडल, इधर विभाग ने मांगा 3 दिन का हिसाब
मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों के ‘फॉलन आउट’ का मामला लगातार गरमा रहा है। नियमितीकरण और स्थायित्व की नीति बनने तक फॉलन आउट रोकने की मांग को लेकर अतिथि विद्वान भोपाल में आंदोलन कर रहे हैं। बुधवार को प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी मुलाकात कर अपनी मांगें उनके सामने रखीं। दिग्विजय सिंह ने अतिथि विद्वानों की मांगों का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से नीति के लिए समयसीमा तय करने और तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग की। इसी बीच उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आया एक पत्र भी चर्चा में है। क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा रीवा-शहडोल संभाग ने सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों से 15, 16 और 17 सितंबर को अवकाश पर रहे अतिथि विद्वानों की जानकारी तत्काल मांगी। 17 सितंबर को जारी पत्र में यह जानकारी उसी दिन दोपहर 1:30 बजे तक भेजने को कहा गया, क्योंकि उच्च शिक्षा आयुक्त भोपाल ने दोपहर 2 बजे तक इसका ब्यौरा मांगा था। करैरा में सामने आया फॉलन आउट का आदेश अतिथि विद्वानों के विरोध के बीच शिवपुरी जिले के शासकीय स्नातक महाविद्यालय करैरा का एक आदेश भी सामने आया है। 15 सितंबर को जारी आदेश में अतिथि विद्वान डॉ. आशा शर्मा को फॉलन आउट किया गया। कॉलेज के आदेश के मुताबिक ग्रंथपाल पद पर अनिरुद्ध सिंह तोमर की पदस्थापना और उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद यह कार्रवाई की गई। फॉलन आउट को लेकर पिछले कुछ दिनों से भोपाल में विरोध चल रहा है। मंगलवार को अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर धरने पर बैठ गए थे। बुधवार को उन्होंने केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर भी अपनी मांग उनके सामने रखी थी। दिग्विजय सिंह को याद दिलाए शिवराज और मोहन यादव के आश्वासन दिग्विजय सिंह से मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने 11 सितंबर 2023 की महापंचायत का जिक्र किया। उनका कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उस समय फॉलन आउट प्रक्रिया बंद कर भविष्य सुरक्षित करने की बात कही थी। यही बात अतिथि विद्वानों ने अपने लिखित मांग-पत्र में भी रखी है। महिला अतिथि विद्वानों ने 28 अगस्त 2026 को उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई मुलाकात का भी हवाला दिया। मांग-पत्र के मुताबिक उन्होंने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर नीति बनने तक फॉलन आउट रोकने की मांग की थी और उन्हें जल्द इस प्रक्रिया को रोकने का आश्वासन मिलने का दावा किया है। वहीं बुधवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने से इनकार किया। इसके बाद अतिथि विद्वानों का विरोध जारी है। दिग्विजय बोले- नीति बनने तक बंद हो फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने सरकार से नियमितीकरण और स्थायित्व की नीति बनाने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने तथा नीति लागू होने तक फॉलन आउट रोकने की मांग की। अतिथि विद्वानों के मांग-पत्र में भी यही दो प्रमुख मांगें हैं—स्थायित्व/नियमितीकरण की नीति के लिए समयसीमा तय हो और पॉलिसी लागू होने तक फॉलन आउट प्रक्रिया बंद रहे। अब एक तरफ अतिथि विद्वान आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं और दूसरी तरफ उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले तीन दिनों का ब्यौरा तलब किया है। ऐसे में अतिथि विद्वानों की नजर इस बात पर है कि सरकार फॉलन आउट और स्थायित्व की नीति को लेकर आगे क्या फैसला करती है। https://videos.mpbreakingnews.in/v/wp/2026/09/mpbn-170926-f6iapw.mp4
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