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नौकरी के बदले पैसे मांगने वाला अफसर बर्खास्त:भास्कर रिपोर्टर ने महिला आवेदक का भाई बनकर किया था आंगनबाड़ी भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा
दैनिक भास्कर ऐप की खबर का बड़ा असर हुआ है। पाली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के पदों पर भर्ती में 30 से 40 हजार रुपए में सिलेक्शन कराने का दावा करने वाले संविदा पर लगे ब्लॉक कॉर्डिनेटर राकेश कुमार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। ब्लॉक कॉर्डिनेटर ने कैमरे पर पैसे के बदले नौकरी लगाने का दावा किया था। दैनिक भास्कर डिजिटल ने 'राजस्थान में 40 हजार रुपए में मिल रही नौकरी : आंगनबाड़ी में भर्ती में पैसे का खेल, ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर शामिल, बोला- सब हम पर छोड़ दो' शीर्षक के साथ खबर छापकर इसका खुलासा किया था। तह तक जाने के लिए रिपोर्टर ने अभ्यर्थी से आंगनबाड़ी भर्ती में आवेदन करवाया था। कुछ समय बाद ही ब्लॉक कॉर्डिनेटर ने अभ्यर्थी से पैसे के बदले नौकरी लगाने की डिमांड की थी। आदेश में खबर का हवाला पाली में महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक प्रकाश चंद्र ने गुरुवार को आदेश जारी कर ब्लॉक कॉर्डिनेटर राकेश कुमार को नौकरी से हटा दिया। उन्होंने आदेश में लिखा- दैनिक भास्कर एप पर प्रकाशित "राजस्थान में 40 हजार रुपए में मिल रही नौकरी: आंगनबाड़ी में भर्ती में पैसे का खेल, ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर शामिल, बोला- सब हम पर छोड़ दो" खबर से गंभीर मामले सामने आया। संविदा पर कार्यरत ब्लॉक कॉर्डिनेटर राकेश के अवैध रूप से पैसों की मांग करना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। राकेश ने सविंदा कर्मचारी के कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर राजकीय कार्य में हस्तक्षेप करके गोपयनीय दस्तावेजों एवं पत्रावलियों की गोपनियता को भंग किया। विभाग की छवि खराब करने पर राकेश को नौकरी से हटाने के आदेश जारी किए। भर्ती निकलते ही एक्टिव हो गई थी दलाल गैंग महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) ने अलग-अलग समय पर 28 जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती निकाली। इनमें पाली जिले में 22 कार्यकर्ता और 60 सहायिका के पद थे। समेकित बाल विकास सेवाएं के उपनिदेशक ने 10 जुलाई 2026 को भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था। आवेदन की अंतिम तारीख 10 अगस्त 2026 थी। भर्ती निकालते ही पैसे लेकर नौकरी लगवाने का दावा करने वाले कई दलाल नेटवर्क एक्टिव हो गए। सच सामने लाने के लिए रिपोर्टर ने आंगनवाड़ी में काम करने वाली महिलाओं से सम्पर्क किया। एक महिला अभ्यर्थी सुमन (बदला हुआ नाम) को विश्वास में लेकर उसे पाली ग्रामीण केंद्र पर आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर आवेदन करने के लिए कहा। फॉर्म में बताया कि महिला का पति से विवाद है और पीहर में रह रही है। 12वीं में 60% हैं और कम्प्यूटर कोर्स कर रखा है। सुमन ने आंगनवाड़ी सहायिका के पद का फार्म भरकर 15 जुलाई को महिला एवं बाल विभाग के कार्यालय में जमा करवा दिया। ब्लॉक कॉर्डिनेटर ने कहा था- पैसे देने होंगे, नहीं तो फॉर्म रिजेक्ट इसके कुछ दिन बाद ही बाल विकास परियोजना विभाग में संविदा पर काम कर रहे राकेश ने पहले से काम कर रही एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से कहा कि- उसके क्षेत्र में रहने वाली सुमन ने आवेदन किया है। वो सुमन से बात करके बताए कि अगर उसे सिलेक्शन करवाना है तो पैसे देने होंगे। वरना फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा। अब पढ़िए- कैसे रिपोर्टर महिला अभ्यर्थी का भाई बनकर गया और पूरा खुलासा किया आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के कहने पर रिपोर्टर अभ्यर्थी सुमन का भाई बनकर बाल विकास परियोजना के कार्यालय पहुंचा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मीटिंग चल रही थी। सुमन और रिपोर्टर ने काफी देर ब्लॉक कॉर्डिनेटर राकेश का इंतजार किया। मीटिंग के बाद राकेश ने कार्यालय के बाहर आकर रिपोर्टर से साइड में जाकर बात की। पढ़िए- पूरी बातचीत… रिपोर्टर : अभ्यर्थी का भाई हूं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से बात हुई थी। सिलेक्शन को लेकर आपसे मिलने के लिए कहा था। सिलेक्शन में कितना टाइम लगेगा? राकेश : अभी तो आचार संहिता है। डेढ़ महीना लग जाएगा। रिपोर्टर : सलेक्शन हो तो जाएगा ना? राकेश : हां, वो मैं करवा दूंगा। जो भी कमेटी बैठेगी, मैं सबकुछ अरेंज कर दूंगा। रिपोर्टर : कितने रुपए देने होंगे? राकेश : 30 से 40 हजार रुपए। रिपोर्टर : कब? सिलेक्शन से पहले या बाद में? राकेश : पैसे ऑर्डर होने के एक हफ्ते पहले देने होंगे। ज्यादा पहले पैसे नहीं लेंगे ताकि आपको भी दिक्कत नहीं आए। बस ध्यान रखना किसी को पता न लगे, न घर पर न ऑफिस में। रिपोर्टर : मेरिट में कोई और तो नहीं है, जिसके ज्यादा नंबर हैं? राकेश : 101% सलेक्शन करवा देंगे। मेरिट का सब हम पर छोड़ दो वो सब हम देख लेंगे। (हमें कोई डील नहीं करनी थी। ऐसे में रिपोर्टर ने पैसों का इंतजाम होने पर दोबारा कॉन्टेक्ट करने की बात कही और वहां से चला आया। ) फर्जीवाड़ा : मेरिट वाले अभ्यर्थियों से सिलेक्शन के नाम पर वसूली आवेदनों के आधार पर जब मेरिट लिस्ट बन जाती है तो वसूली करने वाले गैंग में शामिल विभाग के कर्मचारियों का असली काम शुरू होता है। वो उनके नाम शॉर्टलिस्ट करते हैं, जिनके सिलेक्शन की सबसे ज्यादा संभावना होती है। इन अभ्यर्थियों से पुरानी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए संपर्क करके सिलेक्शन कराने के नाम पर पैसे मांगते हैं। कोई अभ्यर्थी देने से इनकार कर देती है तो उसे डॉक्युमेंट में कमी बताकर रिजेक्ट करने का डर दिखाते हैं। फर्जीवाड़े में विभाग के कई कर्मचारी शामिल हैं। इस केस से समझिए किस तरह हो रहा फर्जीवाड़ा आंगनबाड़ी सहायिका बनाने के नाम पर 20 हजार की रिश्वत मांगी सवाईमाधोपुर के बिसायती मोहल्ला में रहने वाले अली हुसैन ने सितंबर 2024 में एसीबी में शिकायत दी कि उसकी बहन फरहानाज से आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर नौकरी लगाने के नाम पर अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी (एएओ) रामकिशन कुम्हार ने 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। पैसे नहीं देने पर दस्तावेजों में कमी बता कर रिजेक्ट करने की बात कही। बाद में सौदा 15 हजार रुपए में तय हुआ। एसीबी ने एएओ रामकिशन कुम्हार को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इन्वेस्टिगेशन की ये खबर भी पढ़ेंः मिठाई पर चांदी नहीं 'जहर':लैब टेस्ट में 99% वर्क नकली, चांदी में एल्युमिनियम और सोने में तांबा-जिंक; लिवर-किडनी खराब होने का खतरा राजस्थान में काजू कतली, बर्फी जैसी मिठाइयों पर लगने वाले चांदी और सोने के वर्क एल्युमिनियम और तांबे से तैयार हो रहे हैं। वहीं एल्युमिनियम जिसे खाने से लिवर-किडनी खराब हो सकती है। कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है…(CLICK कर पढ़ें)
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