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नर्सिंग फर्जीवाड़ा: सुप्रीम कोर्ट से ग्वालियर-चंबल के छात्रों को झटका:परीक्षा की अनुमति के लिए हाईकोर्ट जाने को कहा, हाईकोर्ट ने भी राहत से किया इनकार
मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अलग-अलग सुनवाई हुई। ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। कुछ छात्रों ने 13 अगस्त को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर डिवीजन बेंच के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें इन कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार किया गया था। छात्रों की ओर से तर्क दिया गया कि इन कॉलेजों की सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है, इसलिए उन्हें पूर्व वर्षों की तरह परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने हालांकि माना था कि वर्ष 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय समिति की जांच में फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं हुई थी। ऐसे में सीबीआई जांच के बिना कॉलेजों को राहत नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कॉलेज प्रबंधन से सवाल करें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने छात्रों से कहा कि उन्होंने जिस कॉलेज प्रबंधन को फीस, डोनेशन या अन्य राशि दी है, सवाल उससे किया जाना चाहिए। कॉलेज प्रबंधन को सीबीआई जांच का सामना करना चाहिए। यदि कॉलेज नियमों के अनुसार सही है तो जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की एसएलपी खारिज करते हुए उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। हाईकोर्ट में भी सीबीआई जांच पर जोर इधर, मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में नर्सिंग मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका समेत अन्य मामलों पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों को बिना सीबीआई जांच के राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित कॉलेज सीबीआई जांच कराने की वचनबद्धता यानी अंडरटेकिंग देते हैं और सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में स्पष्टीकरण लेकर आते हैं, तो उनकी सीबीआई जांच कराई जा सकती है। जांच के बाद कॉलेज की श्रेणी के आधार पर उनके छात्रों की परीक्षाएं आयोजित कराने पर विचार किया जा सकता है। कुछ कॉलेजों ने दी अंडरटेकिंग सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रुख के बाद मंगलवार को कुछ कॉलेजों की ओर से हाईकोर्ट में सीबीआई जांच कराने की अंडरटेकिंग पेश की गई। हाईकोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लिया और संबंधित कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में क्लेरिफिकेशन आदेश लेकर आने के निर्देश दिए। अब इन कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा में शामिल होने की राह सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण और उसके बाद होने वाली सीबीआई जांच पर निर्भर करेगी। ये खबर भी पढ़ें... नर्सिंग फर्जीवाड़ा: अनसूटेबल कॉलेजों के 2,935 GNM छात्रों को राहत मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े से संबंधित लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट, जबलपुर में सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीजन बेंच ने अनसूटेबल कॉलेजों के जीएनएम पाठ्यक्रम के 2,935 छात्रों को राहत दी है।पूरी खबर पढ़ें
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