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Odisha: भगवान जगन्नाथ के एनिमेटेड चित्रण पर शंकराचार्य की आपत्ति, ‘जय जगन्नाथ’ फिल्म-सीरियल पर रोक की मांग

📰 Inkhabar 🕐 1 min read 📅 August 26, 2026 👁 1 views
Odisha: भगवान जगन्नाथ के एनिमेटेड चित्रण पर शंकराचार्य की आपत्ति, ‘जय जगन्नाथ’ फिल्म-सीरियल पर रोक की मांग
Odisha News: पुरी के गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भगवान जगन्नाथ पर आधारित प्रस्तावित एनिमेटेड फिल्म और ‘जय जगन्नाथ’ सीरियल में किए जा रहे चित्रण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि भगवान जगन्नाथ के स्वरूप को शास्त्रीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए. गजपति महाराजा के आवासीय कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, भुवनेश्वर की Ele Animations Pvt. Ltd. द्वारा तैयार किए जा रहे एनिमेटेड प्रोडक्शन को लेकर शंकराचार्य ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. इसके बाद पुरी की मुक्तिमंडप पंडित सभा ने उनके विचारों और निर्णय से गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव को अवगत कराया. प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग शंकराचार्य का आरोप है कि प्रस्तावित एनिमेशन में भगवान जगन्नाथ के स्वरूप को जिस तरीके से दिखाया गया है, वह धार्मिक ग्रंथों में वर्णित स्वरूप और परंपरागत मान्यताओं के अनुरूप नहीं है. उन्होंने ऐसे चित्रण को गंभीर धार्मिक विषय बताते हुए फिल्म और इससे जुड़ी सामग्री की रिलीज तथा प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि भगवान जगन्नाथ की पूजा-पद्धति, संस्कृति और दर्शन की अपनी विशिष्ट परंपरा है. ऐसे में बिना शास्त्रीय आधार के उनके स्वरूप में बदलाव कर एनिमेटेड माध्यम से प्रस्तुति करना उचित नहीं माना जा सकता. शंकराचार्य ने आशंका जताई कि इस तरह की सामग्री का प्रभाव नई पीढ़ी की धार्मिक समझ पर भी पड़ सकता है. मुक्तिमंडप पंडित सभा ने भी किया समर्थन मुक्तिमंडप पंडित सभा ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय पर पुनर्विचार की मांग का समर्थन किया है. बताया गया है कि पहले फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से संबंधित याचिका पर न्यायालय ने हस्तक्षेप नहीं किया था. शंकराचार्य ने भगवान जगन्नाथ के ‘दारु ब्रह्म’ स्वरूप को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अथर्ववेद परिशिष्ट, गोपाल सहस्रनाम सहित विभिन्न शास्त्रीय संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित स्वरूप से अलग किसी प्रकार का चित्रण स्वीकार्य नहीं होना चाहिए. उन्होंने धार्मिक मामलों में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर भी अपनी राय रखी. उनका कहना है कि किसी न्यायिक निर्णय से असहमति जताना और उसके पुनर्विचार की मांग करना न्यायपालिका को चुनौती देना नहीं है, बल्कि धार्मिक परंपराओं और स्थापित सिद्धांतों के आधार पर अपनी बात रखने का अधिकार है. ‘शास्त्रीय प्रमाण और परंपरा का ध्यान रखा जाना चाहिए’ शंकराचार्य ने सनातन वैदिक परंपरा में भगवान के साकार और निराकार स्वरूप से जुड़े सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक चरित्रों को प्रस्तुत करते समय शास्त्रीय प्रमाण और परंपरा का ध्यान रखा जाना चाहिए. उन्होंने एनिमेटेड फिल्म, सीरियल या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से भगवान जगन्नाथ के कथित रूपांतरण वाले चित्रण के प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है. इस विवाद के सामने आने के बाद एक बार फिर भगवान जगन्नाथ की धार्मिक परंपरा, आस्था और आधुनिक तकनीक के जरिए उनके चित्रण को लेकर बहस शुरू हो गई है. अब इस मामले में संबंधित पक्षों की अगली कार्रवाई और प्रस्तावित एनिमेटेड सामग्री को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है. (ओडिशा से अक्षय महाराणा की रिपोर्ट)
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