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पूर्व राज्यपाल कमला बेनीवाल को हाईकोर्ट से राहत:आपराधिक कार्रवाई रद्द, कहा- सिविल, राजस्व मामलों को आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुजरात की पूर्व राज्यपाल दिवंगत कमला बेनीवाल के खिलाफ करोड़ों रुपयों की सरकारी जमीन हड़पने के मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्ध कर दिया है। जस्टिस गणेश राम मीणा की बेंच ने यह आदेश कमला बेनीवाल सहित 17 आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा- जब मामला सिविल और राजस्व अदालतों में लंबित हो तो उसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता है। यह पूरा विवाद कृषि भूमि के पट्टे, स्वामित्व और खातेदारी अधिकारों से संबंधित है। जो मूल रूप से सिविल और राजस्व प्रकृति का है। ऐसे में सिविल विवाद को आपराधिक रूप देना अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के प्रसंज्ञान आदेश और एडीजे कोर्ट के रिवीजन आदेश को रद्द कर दिया। अलग-अलग कानूनी फोरम पर मामले लंबित अदालत ने कहा- इस मामले से संबंधित केस अलग-अलग कानूनी फोरम में लंबित हैं। याचिकाकर्ताओं को साल 1958 में दिए गए खातेदारी अधिकार, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का जमीन अवाप्ति करना, भू-राजस्व अधिनियम के तहत रेफरेंस और मुआवजे का वितरण जैसे मुद्दे अभी भी हाईकोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड में विचाराधीन हैं। जब तक सक्षम सिविल और राजस्व अदालतें इन अधिकारों को रद्द नहीं कर देतीं, तब तक धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का आरोप नहीं बनता है। करीब 14 साल पहले हुई थी शिकायत इस मामले में करीब 14 साल पहले संजय किशोर अग्रवाल ने 16 अगस्त 2012 को कोर्ट में शिकायत दी थी। इसमें बताया था कि साल 1951 में सरकार ने अनुपयोगी कृषि भूमि को 20 साल के लिए खेती पर देने की योजना बनाई थी। बाद में संशोधन से 20 साल की अवधि को बढ़ाकर 25 साल कर दिया। कहा गया कि 25 साल बाद जमीन पुन राज्य सरकार की हो जाएगी। सरकार ने 5 जनवरी 1953 को राजेंद्र सिंह और अन्य की किसान सामूहिक कृषि सहकारी समिति झोटवाड़ा को भूमि आवंटित की। जबकि यह समिति 13 फरवरी 1953 को रजिस्टर्ड हुई थी। समिति के सदस्य खेती की जगह अन्य कार्य करने लग गए, लेकिन उन्होंने गलत तथ्यों के आधार पर खातेदारी अधिकार प्राप्त कर लिए। 25 साल पूरे होने के बाद सरकार ने जमीन वापस नहीं ली। इसके कुछ साल बाद जेडीए ने पृथ्वीराज नगर योजना के लिए जमीन अवाप्ति की अधिसूचना जारी कर दी। समिति सदस्यों को अवाप्ति के बदले मुआवजे के रुप में 15 फीसदी विकसित जमीन देने का ऑफर दिया गया। कोर्ट ने मुकदमा चलाने का आदेश दिया इस बीच अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारिता ने अपनी रिपोर्ट में माना कि समिति सदस्य गलत और झूठे तथ्यों के आधार पर मुआवजे में जमीन लेने की कोशिश कर रहे हैं। समिति के वर्तमान सदस्यों में से एक भी सदस्य समिति का ऑरिजनल सदस्य नहीं हैं। इन लोगों ने फर्जीवाड़ा करके करीब 400 करोड़ रुपए की 1516 वर्गमीटर जमीन मुआवजे में ले ली है, लेकिन करधनी थाने ने मामले में एफआर लगा दी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एफआर का विरोध करते हुए कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटिशन दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 15 मई 2014 को कमला बेनीवाल सहित अन्य के खिलाफ प्रसंज्ञान लेकर मुकदमा चलाने के आदेश दिए थे। मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर एडीजे कोर्ट ने भी दखल देने से इनकार कर दिया था। इन दोनों आदेश को रद्द करने के लिए आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई थी।
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