top
Punjab Chunav 2027: क्यों सुर्खियों में रहता है अमृतसर ईस्ट? सिद्धू-मजीठिया की टक्कर से AAP के उलटफेट तक; दिलचस्प है सीट का सियासी इतिहास
Amritsar East Election History: पंजाब की सियासत में कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं रहता, बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत माना जाता है. अमृतसर ईस्ट ऐसी ही हाई-प्रोफाइल सीट है. 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर इस सीट पर सियासी निगाहें टिक सकती हैं. इसकी वजह है इस सीट का छोटा लेकिन बेहद दिलचस्प चुनावी इतिहास, जिसमें बीजेपी-कांग्रेस की सीधी टक्कर, नवजोत सिंह सिद्धू की एंट्री, बिक्रम सिंह मजीठिया की चुनौती और आम आदमी पार्टी की चौंकाने वाली जीत शामिल है. 2012 में बनी नई सीट अमृतसर ईस्ट विधानसभा अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट परिसीमन के बाद 2012 में अस्तित्व में आई. यानी यह पंजाब की अपेक्षाकृत नई विधानसभा सीट है. पहली बार हुए चुनाव में बीजेपी ने नवजोत कौर सिद्धू को मैदान में उतारा. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सिमरप्रीत कौर को हराकर सीट पर कब्जा किया. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नवजोत कौर सिद्धू को 33,406 वोट मिले, जबकि सिमरप्रीत कौर को 26,307 वोट मिले. जीत का अंतर 7,099 वोट रहा. उस समय बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन में थे और अमृतसर ईस्ट मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहा. यही वजह है कि शुरुआत से ही यह सीट पंजाब की शहरी राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाने लगी. 2017 विधानसभा में फिर बदला समीकरण 2017 का चुनाव आते-आते पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव हो चुका था. नवजोत सिंह सिद्धू बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके थे और उन्होंने अमृतसर ईस्ट से चुनाव लड़ा. सिद्धू ने इस चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की और करीब 40 हजार से अधिक वोटों के अंतर से सीट अपने नाम की. इस जीत के साथ अमृतसर ईस्ट पर सिद्धू परिवार की पकड़ और मजबूत दिखाई दी, क्योंकि जब बीजेपी की तरफ से नवजौत कौर खड़ीं हुई तो वो चुनाव जीत गईं और जब इसी सीट से नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस की तरफ से खड़ें हुए तो वो भी चुनाव जीत गए. यही वह दौर था जब अमृतसर ईस्ट एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस और अकाली दल की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का प्रतीक बनने लगी. 2022 में हुआ सिद्धू बनाम मजीठिया का हाई वोल्टेज मुकाबला 2022 में अमृतसर ईस्ट ने पूरे पंजाब का ध्यान खींच लिया. कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सामने SAD (Shiromani Akali Dal) के दिग्गज नेता बिक्रम सिंह मजीठिया मैदान में उतरे. मजीठिया ने अपनी पारंपरिक सीट मजीठा के साथ अमृतसर ईस्ट से भी चुनाव लड़ा. दोनों नेताओं के बीच पहले से चली आ रही राजनीतिक तनातनी ने मुकाबले को और हाई-प्रोफाइल बना दिया. लेकिन इस सिद्धू बनाम मजीठिया मुकाबले का फायदा किसी बड़े नेता को नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ज्योत कौर को मिला. उन्होंने 39,520 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. सिद्धू 32,807 वोटों के साथ दूसरे और मजीठिया 25,112 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. यानी आप ने दोनों बड़े चेहरों को पीछे छोड़कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया. 2027 में फिर क्यों महत्वपूर्ण होगी अमृतसर ईस्ट? 2022 के नतीजे ने साबित कर दिया कि अमृतसर ईस्ट पर किसी एक पार्टी या परिवार का स्थायी कब्जा नहीं माना जा सकता. 2012 में बीजेपी, 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी, तीनों चुनावों ने अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर पेश की. अब 2027 में मुकाबला किसके बीच होगा, यह उम्मीदवारों और गठबंधनों के एलान के बाद ही साफ होगा.
Read full article on Inkhabar