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राहुल गांधी के बयान पर भड़के शंकराचार्य, कहा- माफी मांगे नहीं तो कांग्रेस का करेंगे बहिष्कार
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मनुस्मृति पर दिए गए बयान पर घिर गए हैं। नेताओं से लेकर देश के बड़े साधु-संतों और शंकराचार्यों तक सभी उनके बयान की निंदा कर रहे हैं। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बाद एक और शंकराचार्य ने राहुल गांधी के बयान की निंदा की है। द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद का बयान शर्मनाक है। यह भी पढ़े - 'हमें हमेशा उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए', उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लॉन्च किया एआई स्टैक 'ज्ञानी अर्थ' राहुल अपने नफा नुकसान के हिसाब से धर्मग्रंथों की व्याख्या कर रहे- शंकराचार्य ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार सनातन धर्मग्रंथों का अपमान करते हैं लेकिन ऐसा नहीं चलेगा। शंकराचार्य ने कहा कि वे बार-बार सनातन धर्मग्रंथों का अपमान करते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। राहुल अपने राजनीतिक नफा नुकसान के हिसाब से धर्मग्रंथों की व्याख्या करते है। कांग्रेस सांसद के मन में अगर मनुस्मृति को लेकर कोई सवाल है तो बैठकर हमसे चार्चा कर सकते हैं। लेकिन बिना सही जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है। शंकराचार्य ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि वह माफी मांगे नहीं तो हम कांग्रेस पार्टी का बहिष्कार कर देंगे। यह भी पढ़े - राजस्थान जेन-जी आंदोलन से प्रेरित होकर 21 साल की सानिया ने निकाय चुनाव में भरी हुंकार पुणें में राहुल गांधी ने कब कार्यक्रम किया था? बता दें, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने 22 अगस्त को छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित किया था। यह आयोजन पुणे में किया गया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि महिलाओं को दूसरों पर निर्भर बनाकर रखना 'मनुस्मृति की मानसिकता' का हिस्सा है। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए। जब भी मैं पुरुषों से बात करता हूं, महिलाओं को तीन बॉक्स में रखा जाता है। महिलाओं को बेटी, पत्नी या मां के रूप में। मां, पत्नी और बेटी के रूप में देखे जाने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन सिर्फ यही एक आपकी पहचान नहीं हो सकती। यह भी पढ़े - राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार सीधा मुकाबला नहीं, 309 निकायों के 10 हजार वार्डों में दिलचस्प लड़ाई के आसार
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