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रामपुर के 'गुरुजी' की कहानी:40 वर्षों से शिक्षा को बनाया राष्ट्र निर्माण का मिशन
शिक्षक दिवस के अवसर पर रामपुर के जैन इंटर कॉलेज के हिंदी प्रवक्ता डॉ. मुनीश चन्द्र शर्मा का चार दशक से अधिक लंबा और समर्पित शिक्षण जीवन आज की नई पीढ़ी और समूचे शिक्षक समुदाय के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने अध्यापन (Teaching) को कभी महज एक रोजगार नहीं माना, बल्कि इसे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और सशक्त राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम बनाया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इसी उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'राज्य शिक्षक पुरस्कार' से भी नवाजा जा चुका है। डॉ. शर्मा ने अपने शिक्षण कार्य में आधुनिक और रोचक प्रयोगों को शामिल कर विद्यार्थियों के मन में हिंदी विषय के प्रति गहरी रुचि जगाई। यह उन्हीं के बेहतरीन मार्गदर्शन का नतीजा है कि विद्यालय के कई विद्यार्थियों ने वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में जिला और राज्य स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है। एक प्रभावी और कुशल मंच संचालक के रूप में भी उनकी अपनी एक विशिष्ट पहचान है। इसके अलावा, साहित्यिक गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रहने वाले डॉ. शर्मा 'पीयूष' पत्रिका के संपादक की अहम जिम्मेदारी भी बखूबी निभा चुके हैं। किताबी ज्ञान से परे है 'गुरुजी' की पाठशाला डॉ. शर्मा का स्पष्ट मानना है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं है। उनका हमेशा से यही प्रयास रहता है कि विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्य, समयपालन, अनुशासन और ईमानदारी की भी गहरी सीख मिले। विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए वे नियमित पढ़ाई के साथ-साथ योग और प्राणायाम को भी बेहद जरूरी मानते हैं। देश के लिए तैयार कर रहे जिम्मेदार नागरिक समय की पाबंदी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनी कार्यशैली का अहम हिस्सा बनाने वाले डॉ. मुनीश शर्मा, अपने व्याख्यानों और संवाद के माध्यम से छात्रों को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं। उनका यह सफर इस बात को प्रमाणित करता है कि एक आदर्श शिक्षक केवल विषय का ज्ञान नहीं देता, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के संपूर्ण जीवन, सोच और दृष्टि को एक सकारात्मक आकार देता है।
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