top
सफलता के लिए निरंतर सीखना और चुनौतियों से जूझने का जज्बा जरूरी: प्रो. संगीता शुक्ला
सफलता के लिए निरंतर सीखना और चुनौतियों से जूझने का जज्बा जरूरी: प्रो. संगीता शुक्ला करियर की जिम्मेदारी स्वयं लें युवा, धैर्य और प्रभावी क्रियान्वयन से हासिल करें लक्ष्य: सिद्धार्थ चौहान सीसीएसयू के आईबीएस संवाद में विद्यार्थियों को उद्योग जगत की अपेक्षाओं, प्रबंधकीय दक्षताओं और सफल करियर निर्माण के बताए गए व्यावहारिक मंत्र मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज (आईबीएस) में मंगलवार को ‘आईबीएस संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता, निरंतर सीखने और सफल करियर निर्माण के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया गया। मुख्य वक्ता बिकाजी फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड, गुरुग्राम के जनरल मैनेजर (इमर्जिंग मार्केट्स) सिद्धार्थ चौहान ने विद्यार्थियों के साथ अपने व्यावसायिक अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने किया। कार्यक्रम के संयोजक आईबीएस के सहायक आचार्य डॉ. नीरज चौधरी रहे। आजीवन सीखने की आदत विकसित करें विद्यार्थी: प्रो. संगीता शुक्ला कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि सफलता प्राप्त करने और बदलते समय के अनुरूप स्वयं को विकसित करने के लिए निरंतर सीखते रहना आवश्यक है। ज्ञान प्राप्ति किसी कक्षा, पाठ्यक्रम या डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी कमियों को पहचानकर ज्ञान और क्षमताओं को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “सीखना जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है और मैं आज भी सीख रही हूं। ” उन्होंने विद्यार्थियों को अकादमिक उपलब्धियों के साथ संवाद कौशल, व्यावहारिक समझ और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नए विचारों को स्वीकार करने, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने और ज्ञान को व्यवहार में उतारने वाले युवा ही आगे बढ़ेंगे। सफल करियर के छह प्रमुख स्तंभ बताए मुख्य वक्ता सिद्धार्थ चौहान ने कहा कि करियर का सफर हमेशा सीधा नहीं होता। इसमें चुनौतियां, असफलताएं, बदलाव और नए अवसर आते हैं। ऐसे में धैर्य बनाए रखना, परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना और लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है। सफलता केवल लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं मिलती, बल्कि स्पष्ट सोच, सही निर्णय, मेहनत और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से हासिल होती है। उन्होंने सफल करियर और प्रबंधन के छह प्रमुख स्तंभ बताए। इनमें विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता बनाए रखना, निरंतर सीखना, अपने करियर की जिम्मेदारी स्वयं लेना, योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना, मजबूत व्यावसायिक संबंध बनाना और अपने प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध रहना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन गुणों से युवा रोजगार पाने के साथ कार्यक्षेत्र में अपनी अलग पहचान भी बना सकते हैं। चौहान ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं, रुचियों और उपलब्ध अवसरों को पहचानकर करियर की दिशा स्वयं तय करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विचारों को कार्यरूप में बदलकर परिणाम हासिल करने तक प्रयास जारी रखना जरूरी है। प्रभावी संवाद, आत्मविश्वास, अनुकूलनशीलता और प्रामाणिकता भी करियर की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रबंधन का वास्तविक अर्थ व्यवहार में ज्ञान उतारना सिद्धार्थ चौहान ने कहा कि भाषा को सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी बात स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ रखने का अभ्यास करना चाहिए। काम के प्रति समर्पण और अपनी क्षमताओं को लगातार निखारने की इच्छा प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “मैनेजमेंट केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास और व्यवहार में उतारने की प्रक्रिया है। ” प्रबंधन की शिक्षा का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि नेतृत्व, समस्या समाधान, टीमवर्क, निर्णय क्षमता और कार्य निष्पादन जैसे गुणों को व्यावहारिक जीवन में अपनाना भी है। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करें युवा: डॉ. अंशु चौधरी आईबीएस की उपनिदेशक डॉ. अंशु चौधरी ने कहा कि रोजगार से जुड़ी चुनौतियों को केवल बेरोजगारी के नजरिये से देखना पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की अपेक्षाओं और युवाओं के मौजूदा कौशल के बीच के अंतर को समझना भी जरूरी है। आज उद्योग जगत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जिनके पास अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ, प्रभावी संवाद क्षमता, समस्या समाधान का कौशल और जिम्मेदारी से काम करने की योग्यता हो। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपनी दक्षताएं विकसित करने तथा समय और अवसरों का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज किया गया परिश्रम और कौशल विकास भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सहायक होगा। अकादमिक ज्ञान और उद्योग जगत के अनुभवों के बीच सेतु कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग जगत के अनुभवी पेशेवरों के अनुभवों से जोड़ना, उनकी प्रबंधकीय दक्षताओं को विकसित करना और भविष्य की व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करना रहा। ‘आईबीएस संवाद’ श्रृंखला अकादमिक ज्ञान और उद्योग जगत के व्यावहारिक अनुभवों के बीच सेतु स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षक और विद्यार्थी उत्साहपूर्वक शामिल हुए। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, कौशल विकसित करने, चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करने और अपने करियर की जिम्मेदारी स्वयं लेने का संदेश दिया गया।
Read full article on Newsprahari