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साकेत नगर में कमर्शियल एक्टिविटी पर लीगल नोटिस:हाई कोर्ट के वकील ने 15 दिन में कार्रवाई की मांग; सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
साकेत नगर में रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर हाई कोर्ट के एडवोकेट अजय कुमार असुदानी ने मध्य प्रदेश शासन, इंदौर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को कानूनी नोटिस भेजा है। 17 अगस्ते को जारी नोटिस में साकेत नगर में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कर उन्हें तत्काल बंद कराने की मांग की गई है। नोटिस में एडवोकेट ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित (लोगांथन विरुद्ध तमिलनाडु सरकार)मामले में 25 मार्च 2026 और 20 मई 2026 को पारित आदेशों का हवाला दिया है। नोटिस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक, ऐसी गतिविधियों को सील करने और संबंधित कार्रवाई के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। साकेत नगर में 7-8 साल से गतिविधियां बढ़ने का दावा एडवोकेट ने नोटिस में कहा है कि वे स्वयं साकेत नगर में निवास करते हैं और पिछले 7 से 8 वर्षों में क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। इनमें जिम, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया है। जिम के कारण सड़क पर पार्किंग और ट्रैफिक जाम का आरोप नोटिस में साकेत/गुलमोहर क्षेत्र में संचालितजिम का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि इसका संचालन सुबह करीब 6 बजे से रात 10 बजे तक होता है। नोटिस के अनुसार जिम आने वाले सदस्य सड़क के दोनों ओर वाहन पार्क करते हैं, जिससे साकेत से टेलीफोन नगर की ओर जाने वाली सड़क पर ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या पैदा होती है। नोटिस में जिम के बाउंसरों पर लोगों के साथ कथित तौर पर धमकी देने और मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। ये आरोप नोटिस में अधिवक्ता की ओर से लगाए गए हैं। रेस्टोरेंट और स्कूल का भी किया उल्लेख नोटिस में कई रेस्टोरेंट और खान-पान के प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि ये प्रतिष्ठान रिहायशी क्षेत्र में देर रात तक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करते हैं, जिससे रहवासियों को परेशानी होती है। वहीं, साकेत नगर के अंत में स्थित एक स्कूल के कारण सुबह करीब 11 बजे तथा शाम 4:30 से 5 बजे के आसपास भारी ट्रैफिक होने का दावा किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि करीब 100 मीटर की सड़क पार करने में भी 15 से 20 मिनट तक लग जाते हैं। 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी नोटिस में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकतीं। एडवोकेट ने इंदौर के मास्टर प्लान, मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, नगर निगम अधिनियम और संबंधित नियमों का भी हवाला दिया है। एडवोकेट ने शासन-प्रशासन से मामले की जांच कर साकेत नगर में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के लिए 15 दिन के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर वे सुप्रीम कोर्ट में मामले में उचित आवेदन प्रस्तुत करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
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