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सामर-भट्ट की खींचतान में पारस सिंघवी ने बाजी मारी:RSS की पसंद पर पार्टी ने लगाया दांव; अनुभव-संख्याबल और नए पार्षदों से वन-टू-वन संपर्क बना वजह
उदयपुर में भाजपा ने पारस सिंघवी को नगर निगम में मेयर प्रत्याशी बनाया है। पिछले कई दिनों से पार्षद बनने के बाद ही उनका नाम मेयर की दौड़ में था, लेकिन बुधवार का दिन उनके लिए शुभ साबित हुआ। नामांकन के अंतिम दिन महज कुछ घंटों में बदले समीकरणों के चलते ऐन मौके पर उनका नाम आगे आया। संघ की पहली पसंद होने के चलते सिंघवी मेयर प्रत्याशी बनने में सफल रहे। उनके पक्ष में निगम का अनुभव, संख्याबल और आरएएस की पहली पसंद होना अहम रहा। साथ ही प्रमोद सामर और दिनेश भट्ट के बीच चल रही खींचतान का भी उन्हें फायदा मिला। लगातार चल रही माथापच्ची के बीच ज्यादातर पार्षद सिंघवी को मेयर बनने की संभावनाओं में तीसरे नंबर पर मान रहे थे। वहीं दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर ओवरकॉन्फिडेंस में एक-दूसरे को ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी मान रहे थे। कटारिया गुट दिनेश भट्ट के नाम को आगे बढ़ाने में जुटा था। वहीं प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ भी प्रमोद सामर के नाम को फाइनल करवाने में लगे थे। मंगलवार रात और बुधवार सुबह जब मेयर प्रत्याशी का नाम फाइनल करने की मशक्कत चल रही थी, तब भी सिंघवी इस दौड़ में पीछे थे। लेकिन सामर और भट्ट के नाम पर संख्याबल को लेकर सहमति बनाने में दिक्कत सामने आई। इससे पार्टी की चिंता बढ़ गई। अनुभव के साथ संख्याबल के लिहाज से भी सिंघवी की तैयारी पूरी थी। जिला महामंत्री बनने के बाद टिकट वितरण में भी सिंघवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ऐसे में दावेदारी से लेकर पार्षद बनने तक उनका ज्यादातर पार्षदों से सीधा संवाद था। मेयर बनने के लिए भट्ट शहर विधायक के साथ राष्ट्रीय महामंत्री सतीश पूनिया और ओम बिड़ला से पैरवी करवाने में व्यस्त थे। सामर प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लॉबिंग कर रहे थे। तभी पारस सिंघवी दोनों विधायकों के बजाय राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल और लोकसभा सांसद मन्नालाल रावत ये पास लॉबिंग करने में लग गए। जबकि सामर और भट्ट इन दोनों के पास नहीं पहुंचे थे। बाड़ेबंदी के दौरान सिंघवी लगातार सभी 50 पार्षदों से वन-टू-वन मिले। भाजपा के 52 पार्षदों में से सिंघवी ने सिर्फ प्रमोद सामर और दिनेश भट्ट से समर्थन नहीं मांगा। सिंघवी पिछले तीन दिनों से रिजोर्ट के एक-एक कमरे में जाकर नए पार्षदों से मिल रहे थे और अपनी बात कह रहे थे। एक पार्षद से मिलने के बाद समर्थन के लिए ‘ओनली ऑन पारस’ का संदेश भी करवाया। इस बार उदयपुर नगर निगम में भाजपा का सातवीं बार बोर्ड बनना और महापौर बनना तय है।
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